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इस वजह से मेजर जनरल और लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन ने मारी खुद को गोली

Sat, 17 Nov 2018 12:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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तीन दशक से ज्यादा समय तक सेना में सेवाएं दे चुका फौजी अफसर बीमारी के कारण जिंदगी की जंग हार गया। कान की बीमारी से परेशान होकर रिटायर्ड मेजर जनरल चंद्र मोहन शर्मा ने अपने ही घर में खुदकुशी कर ली। वह एक साल से टिनिटस बीमारी से पीड़ित थे। कश्मीर में आर्टिलरी रेजीमेंट को कमांड कर चुके शर्मा ने कई ऑपरेशनों में आतंकियों से लोहा लिया था।
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सेवानिवृत्त होने के बाद करीब पांच साल तक हिमाचल लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष रहे शर्मा नेक और जिंदादिल इंसान थे। अपने दम पर जिंदगी में नई ऊंचाईयों को छुआ। लेकिन पिछले करीब एक साल से टिनीटस बीमारी से वे परेशान रहने लगे।
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उन्हें कान में शोर सुनाई देने लगा। वे परिचितों को कई बार बता चुके थे कि बीमारी की वजह से खासे परेशान हैं। बताया जा रहा है कि इसी वजह से वे डिप्रेशन में चले गए। कान की बीमारी का उन्होंने अपने सूसाइड नोट में भी जिक्र किया है।

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डॉक्टरी भाषा में एक कान या दोनों कान के भीतर सुनाई देने वाली आवाजों को समझाने वाला चिकित्सीय शब्द है। ईएनटी विशेषज्ञ का कहना है कि इस तरह की बीमारी में मरीजों को घंटी बजना, भिनभिनाहट, खटखटाना, सीटी बजना जैसी आवाजें सुनाई देती हैं। मरीज इसे परेशान हो जाता है। अमूमन यह बीमारी 40 वर्ष की आयु के बाद आती है। शुरूआती लक्षण पर उपचार से इसे खत्म किया जा सकता है।
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मेजर जनरल (रि.) चंद्र मोहन शर्मा का जन्म 1951 में शिमला में हुआ था। शिमला के डीएवी स्कूल में शुरुआती शिक्षा के बाद हिमाचल कृषि महाविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर की डिग्री हासिल की।
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1972 में आर्टिलरी रेजीमेंट में कमीशन प्राप्त किया। देश के प्रसिद्ध आर्टिलरी आर्मी वार कॉलेज एंड स्कूल में इंस्ट्रक्टर के पद पर भी सेवाएं दीं। उन्हें सामरिक सूचना तंत्र और आपदा प्रबंधन में महारत हासिल थी।
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उन्होंने एचपीयू शिमला से एचआरडी में पीजी डिप्लोमा, लोक प्रशासन में एमफिल, सोशल साइंस में पीजी डिप्लोमा, डिफेंस स्टडीज में एमएससी और डिफेंस एंड मैनेजमेंट में एमफिल की डिग्री हासिल कर रखी थी। सेना से रिटायर होने के बाद वे हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के 13वें चेयरमैन रहे।
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जम्मू-कश्मीर में मेजर जनरल शर्मा ने आर्टिलरी ब्रिगेड को भी कमांड किया। देश के प्रसिद्ध आर्टिलरी आर्मी वार कॉलेज एंड स्कूल में इंस्ट्रक्टर के पद पर भी सेवाएं दीं। उन्हें सामरिक सूचना तंत्र और आपदा प्रबंधन में महारत हासिल थी।
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