उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मंगल ध्वनि के बीच बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों के साथ ब्यास की आराधना की। वन मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हमारी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और आम दिनचर्या का अभिन्न अंग रहा है। पर्यावरण संरक्षण की प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए तथा भारत की मुख्य नदियों में शुमार ब्यास की पवित्रता बनाए रखने के लिए ब्यास आरती की परंपरा आरंभ की गई है।