हिमाचल के छह बार सीएम रहे वीरभद्र सिंह समेत कांग्रेस के ये दिग्गज नेता लोकसभा चुनाव में अपना गढ़ नहीं बचा पाए। इन नेताओं के हलकों में बंपर वोट डलने के बाद भी कांग्रेस के खाते में वोटों का संकट बना रहा।
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प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और पार्टी प्रत्याशी तक अपने गढ़ों को नहीं बचा पाए। आखिर ऐसा क्यों हुआ, इस दिशा में नए सिरे से मंथन करने की जरूरत महसूस की जाने लगी है।
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लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की चारों सीटों में हुई हार ने यह भी साबित कर दिया है कि पार्टी नेताओं के प्रचार में भी खोट रहा है। हैरानी की बात यह है कि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी के बागी नेताओं की घर वापसी की गई थी और माना जा रहा था कि कांग्रेस चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों के समक्ष कड़ी चुनौती रखेगी।
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चुनावी नतीजों ने कांग्रेस नेताओं की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। कांग्रेस के सभी दिग्गज अपने विधानसभा क्षेत्र में बढ़त तक नहीं दिला पाए। दिग्गजों में गुटबाजी भी कांग्रेस प्रत्याशियों की हार का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
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कांग्रेस में आने के बाद पूर्व केंद्रीय संचार राज्य मंत्री सुखराम भले ही वीरभद्र सिंह के गले मिले थे परंतु कहीं न कहीं दोनों नेताओं के दिलों में दूरियां जरूर रहीं। दोनों नेताओं के दिलों में दूरियों के संकेत लोकसभा चुनाव के दौरान नेताओं के बयानों से स्पष्ट मिलते रहे।
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आया राम, गया राम जैसे बयानों से लोगों में कोई अच्छे संकेत नहीं गए। पार्टी में भितरघात भी लोकसभा चुनाव में चलता रहा। कई प्रत्याशियों ने हाईकमान के पास शिकायतें पहुंचाईं। कई मामलों में कड़े कदम उठाए गए परंतु जिस तरीके से पार्टी में डैमेज कंट्रोल चलाया जाना था, वह तरीके से नहीं चल पाया।