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Himachal: कुलदीप सिंह पठानिया बने हिमाचल विधानसभा के 16वें अध्यक्ष, 1985 में लड़ा था पहला चुनाव

Thu, 05 Jan 2023 07:13 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/चंबा
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कुलदीप सिंह पठानिया बने विधानसभा के अध्यक्ष। - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सोलहवें अध्यक्ष के रूप में भटियात से पांचवीं बार विधायक बने कुलदीप सिंह पठानिया को चुना गया है। धर्मशाला के तपोवन में शीत सत्र के दूसरे दिन पठानिया को सर्वसम्मति से अध्यक्ष बनाया गया। इस संबंध में सदन में तीन प्रस्ताव रखे गए, जिन्हें सत्ता पक्ष और विपक्ष की सहमति से पारित किया गया। दूसरे दिन सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुई। अध्यक्ष के चुनाव के बाद विधायकों ने वक्तव्य भी दिए। दोपहर बाद राज्यपाल का अभिभाषण हुआ और एक अध्यादेश और विधेयक भी सदन के पटल पर रखे गए। सत्र के दूसरे दिन सदन में 11 बजे के बाद तीन प्रस्ताव कुलदीप सिंह पठानिया को विधानसभा अध्यक्ष बनाने के लिए रखे गए।

इस दौरान प्रोटेम स्पीकर चंद्र कुमार ने सदन की कार्यवाही का संचालन किया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पहला प्रस्ताव पेश किया कि कुलदीप सिंह पठानिया विधानसभा अध्यक्ष होंगे। इसका अनुमोदन नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भाजपा विधायक दल की ओर से किया। दूसरा प्रस्ताव उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने प्रस्तुत किया। इसका अनुमोदन शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चौहान ने किया। इसके बाद सोलन के कांग्रेस विधायक धनीराम शांडिल ने तीसरा प्रस्ताव पेश किया। इसका अनुमोदन सुलह से विधायक विपिन सिंह परमार ने किया।
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कुलदीप सिंह पठानिया - फोटो : अमर उजाला
प्रस्ताव पारित होने के बाद कुलदीप सिंह पठानिया को सीएम सुक्खू और विपक्ष के नेता जयराम ने आसन पर बिठाया। सुखविंद्र सिंह सुक्खू और जयराम ठाकुर दोनों ने पठानिया को शुभकामनाएं दीं। कुलदीप सिंह पठानिया ने अपना पहला चुनाव वर्ष 1985, दूसरा 1993, तीसरा 2003 और चौथा चुनाव 2007 में जीता थे। राजनीतिक पृष्ठभूमि से दूर-दूर का नाता न रखने वाले कुलदीप सिंह पठानिया ने वर्ष 1985 में वकालत छोड़ अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने भटियात से पहला चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 1993 और 2003 में पठानिया ने विधानसभा चुनाव बतौर निर्दलीय प्रत्याशी लड़े और जीते। 
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यहां रोचक बात यह रही कि चुनावी रणभेरी में दो मर्तबा निर्दलीय चुनाव लड़ने के बावजूद अपनी निष्ठाएं उन्होंने कांग्रेस के साथ ही रखीं और दोनों बार कांग्रेस सरकारों को बिना किसी शर्त के अपना समर्थन दिया। इसके बाद पठानिया 2007 में कांग्रेस के टिकट पर दोबारा चुनाव जीते। वर्ष 2022 का चुनाव भी कांग्रेस के टिकट पर जीता और पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे।  स्वच्छ छवि और राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी को दोनों पार्टियों के नेताओं ने सर्वसम्मति से 14वीं विधानसभा में बतौर अध्यक्ष पद के लिए मनोनीत किया।

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कुलदीप सिंह पठानिया - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस के प्रति कुलदीप सिंह पठानिया की निष्ठा का ही फल है कि आज उन्हें विधानसभा के सर्वोच्च पद से नवाजा गया है । पहली विधानसभा के पहले अध्यक्ष के तौर पर भटियात विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले जयबंत राम उपमन्यु रहे हैं। एक बार फिर से भटियात विधानसभा क्षेत्र से इतिहास दोहराया गया है। पठानिया के विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद पूरे भटियात विधानसभा क्षेत्र में जश्न का माहौल है। दो दिनों से उनके पैतृक गांव छलाड़ा में भी आतिशबाजी, मिष्ठान बांटकर खुशी मनाई जा रही है।  
 
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पूर्व सीएम जयराम के साथ कुलदीप पठानिया। - फोटो : अमर उजाला
डिप्टी रेंजर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे पठानिया के पिता 
कुलदीप सिंह पठानिया का परिवार मूलत: चुवाड़ी के गगाहर गांव का रहने वाला है। बाद में यह परिवार सिहुंता के छलाड़ा में आकर बस गया। पठानिया के पिता बलदेव सिंह पठानिया वन विभाग से बतौर डिप्टी रेंजर सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी माता कुशल गृहणी थी। धर्मपत्नी मीना पठानिया कुशल गृहणी होने के साथ-साथ पठानिया की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। साथ ही उनके इकलौते बेटे सुनाभ सिंह पठानिया भी अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए वकालत करने के साथ राजनीति में भी बराबर कदमताल कर रहे हैं। सुनाभ सिंह पठानिया पूर्व में चंबा-कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के युवा कांग्रेस के महासचिव रह चुके हैं। वर्तमान में जिला चंबा युवा कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। 
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