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तस्वीरें: 378 साल पुरानी परंपरा से आप भी हो जाएं वाकिफ

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राजदेवता माधोराय की भव्य और शाही अंदाज में निकली जलेब के साथ ही बुधवार को मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव शुरू हो गया। देव-मानस मिलन के इस महोत्सव में सवा सौ से ज्यादा देवी-देवता छोटी काशी पहुंचे हैं। पढ़िए क्या है इस महोत्सव का इतिहास? मंडी रियासत का इतिहास सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से शुरू हुआ। राजा साहूसेन के छोटे भाई बाहूसेन ने अपने भाई से नाराज होकर बल्ह के हाट में अपनी राजधानी बसाई थी। इसी के साथ मंडी रियासत की स्थापना हुई। 1527 में अजबर सेन ने बाबा भूतनाथ मंदिर के साथ ही मंडी शहर की स्थापना की। इनपुट: भूपेंद्र राणा, फोटो: जय कुमार
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कालांतर में मंडी शिवरात्रि में शैवमत के साथ लोक देवताओं का जुड़ाव रहा है। पंद्रहवीं शताब्दी में राजा अजबर सेन ने जब बटोहली से अपनी राजधानी ब्यास नदी के उस पार स्थापित की, संभवत: इसी दौरान महाशिवरात्रि के पर्व का शुभारंभ हुआ। इसे दो दिन के लोकोत्सव के रूप में मनाया जाता रहा, जिसमें मंडी जनपद के लोक देवताओं की भागीदारी थी। राजा सूरज सेन का शासन काल 1637-1664 के दौरान रहा है।
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सूरज सेन की दस रानियां और अट्ठारह पुत्र थे। एक के बाद एक सभी बेटे काल का ग्रास होने पर राजा भयभीत हो उठा। उसे अपना राज्य छीन लिए जाने की आशंका सताने लगी। उसने अपना राज्य भगवान विष्णु के प्रतीक माधोराय को समर्पित कर दिया और स्वयं राज्य का संरक्षक बनकर राजकाज देखने लगा।

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मंडी के भीमा सुनार ने माधोराय की चांदी की प्रतिमा बनाई जो आज भी मौजूद है। इसे पालकी में रखकर धूमधाम के साथ पड्डल मैदान तक ले जाया जाता है। सूरज सेन ने ही मंडी शिवरात्रि को लोकोत्सव का स्वरूप प्रदान करते हुए जनपद के देवी-दवेताओं को मंडी नगर में आमंत्रित करने और एक सप्ताह तक मंडी नगर में मेहमान बनकर रखने की परंपरा भी डाली थी।
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बुधवार को परंपरा के अनुसार जलेब में एक दर्जन से अधिक देवी-देवताओं के रथ और देवलु शामिल हुए। यही नहीं, छह साल बाद शिवरात्रि महोत्सव में पहुंचे देव मगरू महादेव ने भी जलेब में शिरकत की।
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अराध्य देव बाबा भूतनाथ व राज देवता माधो राय की पूजा अर्चना कर जलेब में शिरकत की। जलेब के साथ मुख्यमंत्री पैदल पड्डल ग्राउंड पहुंचे। वीरभद्र सिंह यहां ध्वजारोहण कर सात दिवसीय महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री के साथ मंत्री कौल सिंह ठाकुर, अनिल शर्मा भी मौजूद रहे।
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जलेब शुरू होने से पहले मेला कमेटी की ओर से मुख्यमंत्री व अन्य गणमान्य अतिथियों को पगड़ियां पहनाई र्गइं। जलेब में सबसे आगे पुलिस के घुड़सवार, पुलिस और होमगार्ड बैंड, पुलिस के जवान, महिला पुलिस व स्कूली बच्चे मार्च पास्ट करते हुए चल रहे थे।

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इसके बाद देव रथों में सबसे आगे बालीचौकी क्षेत्र के देवता छानणू-छमाहूं के साथ देवलु वाद्य यंत्रों की धुन पर नाचते गाते चले। इसके बाद देव घटोत्कच कोटलू और मार्कंडेय सराज, देवी अंबिका, सयाटी नाग, मगरू महादेव, लक्ष्मी नारायण, बिठ्ठू नारायण, बह्म देव तुंगासी, महामाया, चुंजुवाला, देवी नाऊ की अंबिका के रथ ने जलेब में शिरकत की।

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इसके बाद माधोराय की पालकी और शुक देव ऋषि शारटी और थाट्टा, देव सरीहटू, झाथीवीर, गणपति, टूटीवीर, केबलू नाग के रथ जलेब में शामिल हुए। जलेब के साथ शिवरात्रि मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त संदीप कदम, विधायक महेश्वर सिंह, नगर परिषद के पार्षद भी मौजूद रहे।

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अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मंडी को पहली बार वेबकास्ट किया गया। बुधवार दोपहर को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पहुंचते ही डीसी मंडी के आधिकारिक फेसबुक पेज और मंडी शिवरात्रि की वेबसाइट www.mandishivratri.com पर लाइव स्ट्रीमिंग का लिंक जारी किया जिसमें पड्डल स्थित सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए बनाए गए मंच से सीधा प्रसारण दिखाया जा रहा है।

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इंटरनेट के माध्यम से इस लिंक पर सीधा प्रसारण मोबाइल पर भी देखा जा सकता है। दुनिया के किसी भी कोने से इंटरनेट के माध्यम से लाइव स्ट्रीमिंग देखी जा सकेगी। वेबकास्ट के माध्यम से इंटरनेट के सहारे दिन और रात्रिकालीन होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम देखे जा सकेंगे। डीसी मंडी संदीप कदम ने बताया कि वेबकास्ट शुरू कर दिया गया है। लोग घर बैठे भी ऑनलाइन सांस्कृतिक सहित अन्य कार्यक्रम का लुत्फ उठा सकते हैं।

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मंदिर में पूजा करते मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह।
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