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देवभूमि ने सेना को दिए 24 जाबांज अफसर, पढ़िए इनके लेफ्टिनेंट बनने तक का संघर्ष

Sun, 11 Dec 2016 09:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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हिमाचल प्रदेश के युवाओं ने एक बार फिर देश की सेना में अफसर बनने में अपना दम दिखाया है। शनिवार को भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की पासिंग आउट परेड से हिमाचल प्रदेश के 24 युवा पासआउट होकर देश की सेना में लेफ्टिनेंट बन गए। उप थल सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जन. एनपीएस हीरा ने परेड की सलामी ली।
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चचेरे भाई से मिली प्रेरणा- हिमाचल प्रदेश के खैरी सुजानपुर टीरा, हमीरपुर निवासी अभिषेक डोगरा शनिवार को पीओपी से पासआउट होकर सेना में अफसर बन गए। उनके पिता श्रीप्रकाश कंप्यूटर ऑपरेटर हैं। मां नानी मिंटो गृहिणी हैं। चंडीगढ़ से मेकैनिकल इंजीनियरिंग करने वाले अभिषेक ने बताया कि उनके चचेरे भाई स्क्वॉड्रन लीडर अरुण ठाकुर उनके लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। उन्होंने एनडीए से प्रशिक्षण प्राप्त कर आईएमए से प्रशिक्षण लेकर कमीशन हासिल किया है।
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पहला आर्मी अफसर बेटा- हिमाचल प्रदेश के नूरपुर के नारां ब्राहम्णा सहोड़ा (कांगड़ा) निवासी सौरव भारती भी आईएमए की पीओपी से पासआउट होकर देश की सेना में अफसर बन गए। उन्होंने बताया कि उनकी स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल सुजान पटीरा से हुई। उनके पिता संतोष सिंह शिक्षक और माता राणो देवी गृहिणी हैं। उनके माता-पिता ही उनके लिए प्रेरणास्त्रोत रहे। वह अपने परिवार के पहले आर्मी ऑफिसर हैं।

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कारगिल युद्ध ने दी प्रेरणा, बन गया अफसर- उस वक्त उम्र काफी कम थी, लेकिन टीवी पर कारगिल युद्ध की खबरें, देश की सेना का जज्बा देखकर हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर टीरा निवासी अमित जोशी ने भी आर्मी में जाने का सपना देखा। शनिवार को आईएमए की पासिंग आउट परेड में उनके अफसर बनने के साथ ही उनका सपना पूरा हुआ। अमित के पिता सुरेंद्र जोशी का हार्ट अटैक से वर्ष 1998 में निधन हो चुका है। माता तृप्ति जोशी सरकारी विभाग में कार्यरत हैं। सैनिक स्कूल से पढ़ने वाले अमित ने बताया कि कारगिल युद्ध ही सही मायनों में उनके लिए सेना में अफसर बनने की प्रेरणा है।
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कैप्टन पठानिया का बेटा बना लेफ्टिनेंट- पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए आईएएस अधिकारी कैप्टन जेएम पठानिया का बेटा दिग्विजय सिंह पठानिया भी सैन्य अफसर बन गया है। शनिवार को इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून में हुई पासिंग आउट परेड के साथ ही दिग्विजय पठानिया लेफ्टिनेंट बन गए हैं। दिग्विजय 9वीं कुमाऊं रेजिमेंट में सेवाएं देंगे। दिग्विजय पठानिया की पासिंग आउट परेड में कैप्टन जेएम पठानिया और उनकी धर्मपत्नी मौजूद रहीं। कैप्टन पठानिया स्वयं भी भारतीय सेना से ही प्रशासनिक सेवाओं में आए थे। वह 2008 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वर्तमान में नगर निगम धर्मशाला के कमिश्नर एवं स्मार्ट सिटी धर्मशाला के सीईओ कम एमडी भी हैं। पंजाब के होशियारपुर जिले के दत्तारपुर गांव के रहने वाले जेएम पठानिया का धर्मशाला से भी नाता रहा है।
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दादा कर्नल अब पोता बना लेफ्टिनेंट- बिझड़ी (हमीरपुर)। पपलोहल गांव के निवासी हर्षित कालिया पुत्र देव शर्मा का चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर हुआ है। शनिवार को बिहार में ऑफिसर ट्रेनिंग सेंटर गया में आयोजित पास आउट परेड के दौरान उनकी मां सारिका शर्मा और पिता देव शर्मा ने उन्हें स्टार लगाकर लेफ्टिनेंट के पद से नवाजा। हर्षित के दादा कर्नल एमएल शर्मा भी 2 मार्च को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर भर्ती हुए थे। हर्षित कालिया की उपलब्धि पर उनके दादा बलराम शर्मा, चाचा पवन कालिया और गांववासियों ने बच्चे की इस उपलब्धि पर क्षेत्र में लड्डू बांटे। सीपीएस इंद्र दत लखनपाल ने भी हर्षित को बधाई दी।
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पिता सेना से रिटायर हवलदार बेटा बना लेफ्टिनेंट- योल (कांगड़ा)। कस्बा योल के विक्रम सिंह राणा ने सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। केंद्रीय विद्यालय योल से उच्च शिक्षा हासिल करने वाले विक्रम सिंह ने नेवी ज्वाइन किया। नेवी से कमीशन प्राप्त कर विक्रम ने आईएमए देहरादून में 4 साल की ट्रेनिंग पूरी कर शनिवार को सेना में बतौर लेफ्टिनेंट कमीशन हासिल किया। विक्रम की नियुक्ति चार राजपूताना राइफल्स में हुई है। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने पिता सेना के रिटायर हवलदार भान सिंह राणा, माता वीना राणा और अपनी पत्नी स्वाति को दिया है।

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अभय की कड़ी मेहनत लाई रंग- रोहड़ू। रोहड़ू उपमंडल के मेल्ठी गांव निवासी अभय चंकरोला की कड़ी मेहनत रंग लाई है। वे भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। आईएमए देहरादून में शनिवार को पासिंग आउट परेड में अभय चंकरोला लेफ्टिनेंट बने हैं। अभय की इस उपलब्धि से उसके माता-पिता काफी उत्साहित हैं। अभय चंकरोला(22) ने पांचवीं तक की शिक्षा मिशन स्कूल रोहड़ू से हासिल की। इसके बाद सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर जमा दो कक्षा तक की पढ़ाई सैनिक स्कूल से ही की। जमा दो कक्षा के बाद अभय ने एनडीए (नेशनल डिफेंस अकादमी) की प्रवेश परीक्षा पास की। उन्होंने तीन साल नेशनल डिफेंस अकादमी पुणे में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद एक वर्ष आईएमए देहरादून में प्रशिक्षण लिया। चार वर्ष के सफल प्रशिक्षण के बाद शनिवार को आईएमए में पासिंग आउट परेड हुई। इसमें अभय चंकरोला को लेफ्टिनेंट पद से नवाजा गया। अभय नौंवी मैकानाइज इन्फेंट्री में बतौर लेफ्टिनेंट बन देश की सेवा करेंगे। अभय के पिता सुरेश चंकरोला वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल मचोती में बतौर प्रधानाचार्य कार्यरत हैं। उनकी माता कल्पना चंकरोला गृहिणी हैं। पिता सुरेश चंकरोला ने बताया कि अभय ने उनका नाम रोशन किया है। अभय भारतीय सेना में एक बड़ा आफिसर बन देश की सेवा करना चाहता था। अभय ने कड़ी मेहनत से अपना सपना पूरा किया है। इससे वे काफी खुश हैं।
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इंजीनियरिंग छोड़कर चुनी सेना- हिमाचल के धौलाकाट निवासी अक्षय भट्ट ने इंजीनियरिंग करने के बाद सेना की राह चुनी। उन्हें यहां का अनुशासन सेना में खींच लाया। उनके पिता ठाकुरदास पेशे से चिकित्सक और मां शमीम लता भट्ट हेल्थ सुपरवाइजर हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा धौलाकाट प्राइमरी स्कूल से हुई। उन्होंने सैनिक स्कूल सुजानपुर टीरा से आगे की शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद पंजाब तकनीकी विवि से मेकैनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली। अक्षय टेक्निकल एंट्री स्कीम से सेना में अफसर बने।
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