यदि आप भी सरकार की ओर से तय शर्तें पूरी करते हैं तो आपके नाम भी सरकारी जमीन हो सकेगी। पांच बीघा तक के अवैध कब्जे सरकार आपके नाम करने जा रही है। आइए जानते हैं किसे और कैसे ये जमीन उपलब्ध होगी-
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पहली शर्त- सरकार यह जमीन उन लोगों को देने की तैयारी कर रही है जिनके पास अभी बहुत कम जमीन है और उन्हें मजबूरन सरकारी या वन भूमि पर कब्जा करना पड़ा है। सरकार की ओर से पेश प्रारूप पॉलिसी के अनुसार शहरों में 2 बिस्वा और ग्रामीण इलाकों में अधिकतम 5 बीघा तक कब्जाई गई भूमि का मालिकाना हक देने का प्रस्ताव है।
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दूसरी शर्त- प्रारूप के अनुसार कब्जा की गई जमीन तभी आपके नाम होगी यदि आपके पास 10 बीघा से कम जमीन है। ग्रामीण इलाकों के कब्जाधारियों की कुल भूमि और अवैध कब्जा मिलाकर 10 बीघा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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तीसरी शर्त- यह कब्जे सिर्फ छोटे और सीमांत किसानों और बागवानों के नियमित किए जाएंगे जो अपनी रोजी रोटी के लिए सिर्फ जमीन पर ही निर्भर है। सरकार ने इन्हीं लोगों को राहत देने के लिए ये पहल की है।
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चौथी शर्त- अवैध कब्जों पर मालिकाना हक 28 अगस्त 2015 से पहले के कब्जाधारियों को मिलेगा। यह हक एसडीएम अथवा सहायक सेटलमेंट अधिकारी द्वारा दिया जाना है।
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पांचवीं शर्त- सरकार ने प्रारूप में 2 बीघा तक की भूमि के लिए 5,000 रुपये प्रति बीघा शुल्क प्रस्तावित किया है। 3 से 5 बीघा तक की भूमि के लिए 10,000 रुपये प्रति बीघा देने होंगे। बताया जा रहा है कि ये शुल्क जमीन आपके नाम करने के होंगे।
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छठी शर्त- ग्रामीणों के आम उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होने वाली भूमि जैसे सड़क, जंगल, मेले के आयोजनों के लिए मैदान, चरागाह, अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होने वाले मैदान, आम रास्ते, कब्रिस्तान, श्मशानघाट, तालाब, नहर, कूहल और चेक डेम पर किए गए कब्जों का मालिकाना हक किसी भी सूरत में नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा जिस वन भूमि के लिए केंद्र की मंजूरी की जरूरत होगी, वह केंद्र सरकार से मांगी जाएगी। यानि आपका कब्जा इस जमीन पर नहीं होना चाहिए।
दरअसल यह प्रारूप हिमाचल सरकार ने हजारों छोटे किसानों व बागवानों को राहत देने के लिए तैयार किया है जिसमें उनके पांच बीघा तक के अवैध कब्जे नियमित हो सकेंगे। उधर, हिमाचल हाईकोर्ट ने भी पांच बीघा तक सरकारी और वन भूमि पर किए कब्जों को नियमित करने के लिए सरकार को पॉलिसी लाने की इजाजत दे दी है। बता दें कि सरकार ने इस आवेदन के साथ भू राजस्व अधिनियम के तहत बनाए गए उन प्रारूप नियमों की प्रति भी पेश की थी, जिसके तहत सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को राहत देने के नियम बनाए गए हैं।