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तस्वीरें: छोटी काशी में राजदेवता माधोराय संग लोगों ने खूब उड़ाया गुलाल

Tue, 14 Mar 2017 01:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
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- फोटो : जय कुमार
छोटी काशी मंडी (हिमाचल प्रदेश) में होली उत्सव पर लोगों ने राजदेवता माधोराय के साथ खूब गुलाल उड़ाया। इस दौरान सेरी मंच पर डीजे की धुनों पर शहर के लोगों ने जमकर मस्ती की। होली का जश्न मनाने के लिए सेरी पर पूरा शहर उमड़ पड़ा। पहाड़ी और होली के गीतों पर युवाओं ने जमकर डांस किया। राजदेवता माधोराय भी पालकी में सवार होकर होली के मतवालों के साथ होली खेलने सड़कों पर उतर आए।
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- फोटो : जय कुमार
माधोराय की जलेब निकलने के साथ ही मंडी में होली की मस्ती समाप्त हो गई। होली का त्योहार मंडी जनपद में देश भर में मनाई जाने वाली होली से एक दिन पूर्व ही मनाया जाता है। होली के मौके पर रविवार सुबह से ही युवाओं की टोलियां सड़कों पर निकल कर एक दूसरे पर रंग गुलाल फेंकते हुए सेरी चानणी की ओर बढ़ने लगी।
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- फोटो : जय कुमार
इस दौरान हजारों लोगों ने जमकर गुलाल उड़ाया और डांस किया। दोपहर तीन बजे राजदेवता माधोराय की पालकी दरबार से निकली। लोगों ने माधोराय के संग होली खेली। राज दरबार से चौहाटा, समखेतर, भूतनाथ होते हुए देव माधोराय की पालकी वापस मंदिर पहुंची। होली में रियासत काल से ही राजदेवता माधोराय की भागीदारी रही है।

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- फोटो : जय कुमार
देर शाम कांभल वृक्ष की टहनियों की पूजा कर उसका होलिका दहन किया गया। भगवान मुहल्ला निवासी धनदेव भारद्वाज का कहना है कि रियासत के समय से होली के दिन राजा का दरबार माधो राय मंदिर के सामने सजता था। इसमें राज दरबारी तथा प्रतिष्ठित जन प्रतिनिधि भाग लेते थे।
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- फोटो : जय कुमार
पीतल के बड़े-बड़े बर्तनों में रंग घोलकर राजा अपने अतिथियों के साथ जमकर होली खेलते थे। पंडित नीधु राम के मुताबिक होली के माध्यम से भक्त प्रहलाद की प्रभु भक्ति की महिमा उजागर होती है।
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- फोटो : जय कुमार
साहित्यकार दीनू कश्यप ने बताया कि होली के दिन पुरोहितों द्वारा निश्चित समय पर राज माधो राय की पालकी रामचंद्र मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, राजा का बेहड़ा, भगवान मोहल्ला, बंगला मोहल्ला, चौबाटा, पलाखा, समखेतर, भुवनेश्वरी मंदिर तथा मंडी नगर के अधिष्ठाता देव भूतनाथ के मंदिरों में जाकर फाग बरधवाती (विदा करना) है।
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- फोटो : जय कुमार
भगवान मोहल्ला निवासी राजेंद्र गर्ग ने बताया कि नगाड़े, शहनाई और घंटियों की आवाज के साथ भगवान माधोराय के आगमन पर मोहल्ले भर के लोग फाग के इर्द-गिर्द चक्कर लगाकर हिंगला, पोपला, नारदा, शारदा के मंत्रोचारण के साथ गुलाल फेंकते हैं। उसके बाद आग के चारों ओर बैठकर भजन कीर्तन का सिलसिला रात भर चलता है।
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