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मौसम का कहर: हिमाचल में 142 सड़कों पर यातायात ठप, 211 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित, दो दिन भारी बारिश का अलर्ट

Wed, 14 Jul 2021 12:33 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला/शिमला
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बोह घाटी में तबाही का मंजर। - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश में पिछले दो दिनों में अचानक आई बाढ़ से नौ लोगों की मौत हो गई है और आठ अन्य लापता हैं। राज्य के राजस्व विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 142 सड़कें अवरुद्ध हैं। 

हिमाचल प्रदेश के में सोमवार को हुई बारिश के बाद मंगलवार को भी एक नेशनल हाइवे सहित 142 सड़कों पर यातायात ठप रहा। 266 बिजली ट्रांसफार्मर और 211 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रदेश के कई क्षेत्रों में अभी भी जनजीवन पटरी पर नहीं लौटा है। सोमवार रात को रोहतांग सहित लाहौल की ऊंची चोटियों पर बर्फ के फाहे गिरे। मंगलवार को प्रदेश में मौसम साफ रहा।

भूस्खलन और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मनाली-लेह मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने का फैसला लिया है। शाम चार बजे के बाद लेह जाने वाले सभी वाहनों को लाहौल के जिस्पा के आगे नहीं जाने दिया जाएगा। पांगी-किलाड़-मनाली रोड पर मडग्रां के पास अवरुद्ध सड़क मंगलवार को भी बंद रही। प्रशासन ने सैलानियों के साथ आम लोगों को नदी-नाले व अन्य संवेदनशील इलाकों की ओर न जाने की हिदायत दी है। कुल्लू जिले में 10, सिरमौर में 43 सड़कें बंद रहीं।
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भागसूनाग में बचाव कार्य। - फोटो : अमर उजाला
सिरमौर में 26 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। कुल्लू में 36, नाहन मंडल में चार और राजगढ़ मंडल में आठ ट्रांसफार्मर खराब पड़े हैं। प्रदेश के सभी क्षेत्रों में बुधवार और गुरुवार को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। 17 जुलाई को शिमला, सोलन, सिरमौर, मंडी, कुल्लू और चंबा में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। पूरे प्रदेश में 19 जुलाई तक मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है।
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बोह घाटी। - फोटो : अमर उजाला
उधर, एनडीआरएफ और प्रशासन ने मंगलवार को मलबे में दबे और पानी में बहे पांच शव बरामद किए। कांगड़ा जिले में सोमवार को भारी बारिश के कारण हुई तबाही के बाद एनडीआरएफ ने दूसरे दिन भी रेस्क्यू अभियान चलाया। शाहपुर उपमंडल की बोह घाटी के रुमेहड़ गांव में मलबे से तीन और शव निकाले गए। एक शव सोमवार को निकाला था। डीसी कांगड़ा निपुण जिंदल ने बताया कि अभी करीब पांच लोगों के दबे होने की आशंका है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रुमेहड़ गांव का हवाई और जमीनी जायजा लिया।

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बोह घाटी में तबाही का मंजर। - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को ढांढस बंधाया और मृतकों के प्रत्येक परिवार को चार-चार लाख रुपए मुआवजे के तौर पर देने की भी घोषणा की। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया है कि प्रशासन की ओर से लोगों की हर संभव मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बारे में केंद्र सरकार को भी मंगलवार को ही अवगत करवा दिया था। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार मंगलवार को ही एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई थी।
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बोह घाटी में बचाव अभियान। - फोटो : अमर उजाला
उधर, पर्यटन नगरी मनाली के हामटा डैम साइट में नाले में गिरने से लापता हुई एमबीबीएस छात्रा का शव बरामद कर लिया गया है, वहीं लाहौल के उदयपुर में चंद्रभागा नदी में गिरी गाड़ी में सवार मुख्याध्यापक का शव भी 22 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ढूंढ निकाला। उधर, सिरमौर में पांवटा साहब के तहत बांगरन गांव के पास गिरि नदी में बने टापू में फंसे छह लोगों को प्रशासन की रेस्क्यू टीम ने 10 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाल लिया।  
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सिरमौर में छह लोगों को बचाया गया। - फोटो : अमर उजाला
पांवटा के एसडीएम विवेक महाजन ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे तक दो महात्मा जहारगिरि, सेवा दास के अलावा गुज्जर नूरा और उसका पुत्र अब्दुल गन्नी, बहु मिसरा और नन्ही बच्ची समीना (3 साल) को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। 30 मवेशियों को तट पर पहुंचाया। 
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कांगड़ा में अपने टूटे आशियाने में बुजुर्ग। - फोटो : अमर उजाला
वहीं, भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं के बीच पर्यटकों के लिए उन सभी अति संवेदनशील स्थानों पर जाने पर रोक है, जहां आपदा की आशंका है। इस संबंध में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सभी जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश जारी कर दिए हैं। पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस अधिकारियों को इसके लिए सुनिश्चित करने को कहा है। 
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भागसूनाग। - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि बारिश से कांगड़ा जिले में बहुत नुकसान हुआ है। एनडीआरएफ की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। सीएम ने कहा कि सभी जिलों के डीसी और एसपी से कहा गया है कि आपदा के बाद जल्द  राहत व बचाव कार्य सुनिश्चित करें और सड़कें खोल दें, ताकि प्रभावितों को सही स्थान तक पहुंचाया जा सके। 
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