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जेबीटी भर्ती को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

Wed, 14 Mar 2018 12:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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जेबीटी भर्ती मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की याचिका खारिज करते हुए अहम फैसला सुनाया है।
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हिमाचल हाईकोर्ट ने टेट मेरिट से जेबीटी भर्ती करने को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने टेट मेरिट से चयन के नियम खारिज किए हैं। ऐसे में इसे इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल के आदेशों के बाद सरकार ने जेबीटी के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में जो बदलाव किए हैं, उसके तहत सरकार जेबीटी के 700 पद भरने के लिए स्वतंत्र है।
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नये नियमों के तहत जेबीटी के 50 फीसदी पद सीधी भर्ती यानी कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर और 50 फीसदी पद बैच वाइज तरीके से भरे जाने का प्रावधान बनाया गया है। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने जेबीटी से जुड़ी याचिकाएं 17 अप्रैल को सुने जाने के आदेश पारित किए। कोर्ट से पारित इन आदेशों से पुरानी प्रक्रिया के तहत चयनित उम्मीदवारों को कोई भी राहत नहीं मिली है।

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प्रदेश सरकार ने साल 2012 में जेबीटी के पदों को भरने के लिए टेट की मेरिट को आधार बनाया था। कुछ अभ्यर्थियों ने इस प्रावधान को यह कह कर चुनौती दी थी कि टेट केवल अध्यापक होने की आधारभूत योग्यता को दर्शाता है न कि यह नौकरी के लिए किसी प्रतियोगी परीक्षा में मेरिट को। इस दौरान सरकार ने टेट की मेरिट के आधार पर हो रही भर्ती प्रक्रिया को जारी तो रखा, लेकिन चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं हो सके।
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ट्रिब्यूनल ने 30 अगस्त, 2017 को इस नियम को खारिज कर दिया और 700 चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाने का मामला लटक गया। सरकार ने ट्रिब्यूनल में पुनर्विचार याचिका दायर कर 11 जनवरी 2018 को टेट की मेरिट पर आधारित पुरानी भर्ती प्रक्रिया जारी रखने की इजाजत ले ली। अभ्यर्थी राकेश कुमार ने ट्रिब्यूनल के इन आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी और 23 फरवरी को हाईकोर्ट ने जेबीटी के स्वीकृत 700 पदों को टेट की मेरिट से भरने पर रोक लगा दी।
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सरकार ने कोर्ट में दी ये दलीलें
- नये सिरे से जेबीटी के पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाती है तो कम से कम 6 महीने के अतिरिक्त समय की जरूरत होगी। पुराने नियमों के तहत चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। केवल नियुक्ति पत्र जारी करना शेष रहता है।
- प्राथमिक स्कूलों में जेबीटी के सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। शिक्षकों की कमी से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। शिक्षा विभाग के लिए इन पदों के लिए रखा गया बजट भी लैप्स होने जा रहा है।
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