हिमाचल में पहले रद्द हुई पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा रविवार को दोबारा चालीस केंद्रों में आयोजित की गई। कुल 39,259 में से 38,227 अभ्यर्थियों ने दोपहर 12 से एक बजे तक परीक्षा दी। परीक्षार्थियों को चार घंटे पहले ही केंद्रों में बुला लिया था। तीन से चार बार चेकिंग के बाद उन्हें मौके पर ही एडमिट कार्ड दिए गए।
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- फोटो : अमर उजाला
परीक्षार्थियों के हाथ में बंधी मौली, राखी, रबड़ बैंड, अंगुठियां, चेन, घड़ी, कड़े, बेल्ट, ताबीज, पर्स के अलावा जूते-जुराबें तक उतरवा लिए गए। उनके कानों की चेकिंग की गई, ताकि कोई उपकरण फिट करके न आ जाए।
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सभी 736 परीक्षा हॉलों में जैमर लगाए गए थे। 25 से 50 मीटर की दूरी तक कोई मोबाइल फोन नहीं चले। हालांकि इससे आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी परेशानी हुई। कई जगह सीसीटीवी भी रहे। पूरी परीक्षा की वीडियोग्राफी की गई। इस बार 1032 परीक्षार्थी गैरहाजिर रहे।
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11 अगस्त को पालमपुर के परौर केंद्र में हुई लिखित परीक्षा में नकल और अपनी जगह सॉल्वरों को बैठाने के फर्जीवाड़े के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। पकड़े गए आरोपियों को छोड़ अन्य सभी ने दोबारा परीक्षा दी। दूसरी बार ली गई परीक्षा में पूरी एहतियात बरती गई।
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जिलों में एसपी खुद मौके पर डटे रहे। परीक्षा केंद्र के अंदर और बाहर पुलिस बल तैनात रहा। परीक्षा के दौरान राज्य कर्मचारी चयन आयोग और पब्लिक सर्विस कमीशन के मानकों को ध्यान में रखकर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई। कलर फोटो और आईडी प्रूफ के बाद एडमिट कार्ड दिए गए।
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आईजी ट्रेनिंग हिमांशु मिश्र ने बताया कि परीक्षा में किसी तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। लिखित परीक्षा का परिणाम अगले दस दिन में आ जाएगा। इसके बाद हर पद के सापेक्ष तीन अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी।
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पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी। केंद्र की सरकारी कंपनी की ओर से लगाए गए जैमरों से न सिर्फ परीक्षा केंद्रों के आसपास 3-जी और 4-जी नेटवर्क पर नकेल कसी गई, बल्कि वाईफाई और ब्लूटूथ डिवाइस एक्टिव न रहने की व्यवस्था की गई थी।
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परीक्षा से एक दिन पहले खुद सभी जिलों के एसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने सेंटरों पर जाकर जैमरों की चेकिंग की। इस दौरान कुछ केंद्रों पर टावर नजदीक होने की वजह से दिक्कत पेश आई तो राताें रात एयरलिफ्ट कर कंपनी ने अतिरिक्त जैमर मंगा लिए और ऐसी जगहों पर चार से पांच जैमर तक लगा दिए।
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ताकि, किसी भी सूरत में फोन, वाईफाई या ब्लूटूथ डिवाइस काम न कर सके। कंपनी को पुलिस इस काम के लिए करीब 28 लाख रुपये चुकाएगी। वहीं, परीक्षा के दिन कई केंद्रों पर ऐसे परीक्षार्थी भी पहुंच गए, जिनका परीक्षा केंद्र कहीं और था। ऐसे परीक्षार्थियों को पुलिस ने कई जगह सरकारी वाहनों से दूसरे केंद्रों तक पहुंचाया।
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आईजी ट्रेनिंग हिमांशु मिश्र ने बताया कि परीक्षा में जिलों को कुछ निर्देश जारी किए गए थे। साथ ही उन्हें अपने हिसाब से अतिरिक्त एहतियाती कदम उठाने के लिए भी कहा था।
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यही वजह है कि इस बार परीक्षा में तीन से चार घंटे पहले ही परीक्षार्थियों को बुला लिया गया और सघन चेकिंग के बाद साढ़े ग्यारह बजे तक हाल के अंदर बैठा दिया गया। परीक्षा हाल में लगे 773 जैमरों को साढ़े ग्यारह से लेकर सवा एक बजे तक एक्टिव रखा गया ताकि नकल की संभावना ही न रहे, साथ ही सेंटर के आसपास भी वाहनों और लोगों की आवाजाही पर नजर रखी गई।
हाईटेक नकल और फर्जी परीक्षार्थियों के पकड़े जाने के बाद सरकार ने 11 अगस्त को हुई लिखित परीक्षा को निरस्त कर दिया था। इसके बाद पुलिस के लिए नकल विहीन परीक्षा जल्द से जल्द कराना चुनौती बन गया था। माना जा रहा था कि परीक्षा नवंबर से पहले नहीं हो पाएगी, लेकिन पुलिस मुख्यालय ने प्रयास कर परीक्षा को बिना विवाद के एक महीने के अंदर ही करा दिया। अब पुलिस की परीक्षा सकुशल होने के बाद अन्य विभागों की भर्तियों में भी जैमर लगाने की प्रथा शुरू होनी की पूरी संभावना है।