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Himachal: भारत के प्रथम मतदाता ने पहली बार घर से किया मतदान, पीएम मोदी ने की प्रशंसा

Wed, 02 Nov 2022 08:29 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, रिकांगपिओ (किन्नौर)

सार

भारत के प्रथम मतदाता श्याम सरण नेगी ने पहली बार घर से किया मतदान किया। मतदान के बाद नेगी ने कहा कि ईवीएम से मत की गोपनीयता सुनिश्चित हुई है। पीएम मोदी ने भी नेगी की प्रशंसा की है। 
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भारत के प्रथम मतदाता ने घर से किया मतदान - फोटो : संवाद
स्वतंत्र भारत के पहले मतदाता श्याम सरण नेगी ने बुधवार को कल्पा में अपने घर से पहली बार बैलेट पेपर से 14वीं विधानसभा के लिए मतदान किया। वोट डालने के बाद श्याम सरण ने कहा कि मतदान लोकतंत्र का महापर्व होता है। हम सभी को मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। पीएम मोदी ने भी देश के सबसे उम्रदराज मतदाता नेगी की प्रशंसा की है। पीएम मोदी ने कहा कि इससे नई पीढ़ी के लोग मतदान के लिए प्रेरित होंगे। 

गौरतलब है  कि पहले नेगी ने कहा था कि वह मतदान केंद्र में जाकर मतदान करेंगे, लेकिन स्वास्थ्य ठीक न होने के चलते घर से ही वोट डालना पड़ा। 34वीं बार मतदान करने वाले नेगी ने पहली बार बुधवार को डाक मतपत्र के माध्यम से वोट डाला।  जुलाई 1917 में जन्मे नेगी ने 1951 से लेकर अब तक 16 बार लोकसभा चुनाव में मतदान किया है। 2014 से हिमाचल के चुनाव आइकन भी हैं। नेगी ने 1951 से हर चुनाव में मतदान किया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनीष गर्ग ने भी शतायु वोटर श्याम सरन नेगी को मतदान करने पर बधाई दी।

जिला निर्वाचन अधिकारी आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि नेगी को उनके घर के प्रांगण में बने डाक बूथ तक लाने के लिए रेड कारपेट बिछाया गया था। मतदान के बाद उनके वोट को एक लिफाफे में बंद कर मतपेटी में डाल दिया गया। श्याम सरण नेगी को टोपी और मफलर भेंट कर सम्मानित किया गया। कहा कि श्याम सरण नेगी न केवल हिमाचल, बल्कि देश के आइकन हैं। हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। 106 वर्ष की आयु होने के बाद भी मतदान करने के प्रति उनका जज्बा इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण में एक-एक मत की कितनी महत्ता है। 

निर्वाचन अधिकारी एवं एसडीएम कल्पा डॉ. शशांक गुप्ता ने बताया कि किन्नौर जिले में 80 वर्ष से अधिक आयु और दिव्यांग मतदाताओं की सुविधा के लिए बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान करवाया जा रहा है। पहले चरण में यह सुविधा एक से तीन नवंबर, दूसरे चरण में छह से आठ नवंबर तक जिले के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को दी जा रही है। पहले चरण में एक नवंबर को 94 पोस्टल बैलेट भेजे गए थे। इनमें 89 लोगों ने मतदान किया। शेष पांच मतदाता दूसरे चरण में कवर करेंगे। दो नवंबर को 130 पोस्टल बैलेट भेजे गए हैं। इस दौरान तहसीलदार कल्पा कंचन देवी और तहसीलदार निचार चंद्र मोहन ठाकुर आदि भी मौजूद रहे।
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देश के पहले मतदाता श्याम सरण नेगी - फोटो : संवाद
पहले मतदाता श्याम शरण नेगी ने चुनाव प्रक्रिया में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की शुरुआत को भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करार दिया है। बकौल नेगी, ईवीएम से मतदान में पारदर्शिता और मतदाता के वोट की गोपनीयता सुनिश्चित हुई है। बुधवार को अमर उजाला से हुए संवाद में उन्होंने पढ़े-लिखे और ईमानदार छवि वाले अच्छे लोगों को राजनीति में आगे लाने के लिए सूबे के मतदाताओं से उत्साह के साथ वोट डालने की अपील की।  श्याम सरण नेगी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पुराने जमाने में पर्ची से मतदान करने पर गोपनीयता भंग होने का खतरा बना रहता था। समय से पहले ही पता लग जाता था कि आपने किस प्रत्याशी को अपना मत दिया है। ईवीएम आने से काफी बदलाव आया है। पूरे देश में अब पारदर्शिता के साथ गुप्त मतदान हो रहा है, जो देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि आज के समय में अच्छी छवि के पढ़े-लिखे लोग चुनाव में आगे आ रहे हैं, इसलिए लोगों को उमंग और उल्लास से मतदान करना चाहिए। हमें अच्छे उम्मीदवार को वोट देना चाहिए। 
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मतदान करते श्याम सरण नेगी। - फोटो : संवाद
उन्होंने कहा कि पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे और अंग्रेज बहुत तंग किया करता थे। अब हम गुलामी से मुक्त हैं, यह बड़ी खुशी की बात है, इसलिए हम सबको मिलकर वोट डालना चाहिए। सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को अपने घरों में ही वोट देने की सुविधा उपलब्ध करवाकर बढ़िया काम किया है। आज मेरे लिए खुशी की बात है कि जिला किन्नौर प्रशासन मेरे वोट डालने के लिए मेरे घर आया है। मेरी आंखों से दिखने कम हो गया है, कान से सुनाई नहीं देता है और पैरों में ताकत नहीं रही, इसलिए मैं चल फिर नहीं सकता हूं।

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भारत के प्रथम मतदाता व डीसी किन्नौर। - फोटो : संवाद
...और पहले मतदाता के तौर पर दर्ज हुआ नाम
श्याम शरण नेगी के अनुसार देश में फरवरी 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ, लेकिन किन्नौर में भारी हिमपात के चलते पांच महीने पहले सितंबर 1951 में ही चुनाव हो गए। आजाद भारत के पहले चुनाव के समय मैं किन्नौर के मूरंग स्कूल में बतौर अध्यापक कार्यरत था। चुनाव में उनकी ड्यूटी लगी थी। वोट देने के लिए भारी उत्साह था और ड्यूटी शौंगठोंग से मूरंग तक थी, जबकि मेरा वोट कल्पा में था। इसलिए, सुबह जल्दी वोट देकर ड्यूटी पर जाने की इजाजत मांगी और मतदान स्थल पर पहुंच गए।
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श्याम सरण नेगी - फोटो : सोशल मीडिया
6:15 बजे मतदान ड्यूटी पर पोलिंग पार्टी पहुंची। पोलिंग पार्टी से जल्दी मतदान करवाने का निवेदन किया। इस पर पोलिंग पार्टी ने रजिस्टर खोलकर उन्हें पर्ची दी। मतदान करते समय उनका नाम देश के पहले मतदाता के तौर पर दर्ज हुआ। वोट डालने के बाद अपनी ड्यूटी पर चले गए थे। पहले के दौर में 7 बजे से वोट डालने की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी। पुराने जमाने में चुनाव की सूचना आकाशवाणी के माध्यम से रेडियो से ही मिलती थी। उस जमाने में मीडिया इतना सक्रिय नहीं था। 
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श्याम सरण नेगी - फोटो : अमर उजाला
कल्पा से की पांचवीं तक पढ़ाई
श्याम शरण नेगी 10 साल की उम्र में स्कूल गए और पांचवीं तक की पढ़ाई कल्पा में की। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए रामपुर गए। रामपुर जाने के लिए पैदल तीन दिन लगते थे। नौवीं कक्षा तक की पढ़ाई रामपुर से की। उम्र ज्यादा होने से 10वीं कक्षा में प्रवेश नहीं मिला। 1940 से 1946 तक वन विभाग में वन गार्ड की नौकरी की। उसके बाद शिक्षा विभाग में चले गए और कल्पा लोअर मिडल स्कूल में अध्यापक बने। 
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