हिमाचल के जनजातीय जिला लाहौल स्पीति के तीन गांवों के 400 लोग घरों में ताले लगाकर कुल्लू-मनाली पलायन को मजबूर हो गए हैं। लाहौल के चंद्रावैली के कोकसर, डिंफू और रमथंग गांव बर्फबारी के चलते देश-दुनिया से कट गए हैं। माइनस 24 डिग्री तापमान में यहां न पानी, न फोन और न ही स्वास्थ्य सुविधा है। बर्फबारी के कारण सड़कें बंद है।
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पहले घरों में कैद थे लोग, अब गांव छोड़ने को हुए मजबूर
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इस इलाके में हेलीपैड की सुविधा भी नहीं है, ऐसे में पलायन मजबूरी बन गया है। बर्फबारी के चलते घाटी में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। जिला प्रशासन ने भी बर्फबारी से निपटने के बजाय विद्युत, स्वास्थ्य, केंद्रीय जल आयोग समेत तमाम सरकारी कार्यालयों में ताला जड़कर यहां तैनात कर्मियों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया है।
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पहले घरों में कैद थे लोग, अब गांव छोड़ने को हुए मजबूर
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प्राइमरी स्कूल भी बंद कर दिया गया है। अध्यापकों और छात्रों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट कर दिया है। इन गांवों के लोग अब चार माह बाद ही अपने घरों का रुख कर सकेंगे। मजबूरन लोगों ने मवेशी रिश्तेदारों के यहां छोड़ दिए हैं।
पहले घरों में कैद थे लोग, अब गांव छोड़ने को हुए मजबूर
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चंद्रावैली से जिप सदस्य प्रेमचंद और कोकसर पंचायत प्रधान ओमप्रकाश का कहना है तीनों गांव रोहतांग दर्रे से सटे होने के कारण यहां का तापमान माइनस 24 डिग्री तक गिर जाता है। ऐसे हालात में मूलभूत सुविधाओं के बिना गांव में रहना मुमकिन नहीं है। शिक्षा उपनिदेशक प्रेमनाथ परशीरा ने बताया कि ग्रामीणों के पलायन के बाद कोकसर प्राइमरी स्कूल को बंद कर दिया है।
पहले घरों में कैद थे लोग, अब गांव छोड़ने को हुए मजबूर
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स्थानीय विधायक रवि ठाकुर का कहना है कि तीन गांवों से पलायन की जानकारी उन तक देर से पहुंची। इसको लेकर जिला प्रशासन से जवाब तलब किया जाएगा। वहीं, पूर्व विधायक डा. रामलाल मारकंडेय का कहना है कि प्रदेश सरकार ने जनजातीय जिले के लोगों को बिना मूलभूत सुविधाओं के सर्दियों में रामभरोसे छोड़ दिया है। प्रशासन और विधायक जिमेदारी से भाग रहे हैं। रिपोर्ट: अशोक राणा, केलांग (लाहौल-स्पीति)