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आग ने किया बेघर, अब आसमान से भी बरसी 'आफत', रो रहा पूरा गांव

Tue, 17 Jan 2017 03:41 PM IST
राजेश हंसरेटा/अमर उजाला, रोहड़ू
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पहले आग ने पूरा गांव जलाकर राख कर दिया। अब आसमान से भी आफत की बर्फबारी बरस रही है। शिमला के तांगणू गांव में आग से झ़ुलसे लोग अब ठंड में कांपने को मजबूर है। यहां भारी बर्फबारी ने गांववालों को बड़ी मुसीबत में डाल दिया है। करीब दो फीट बर्फ में दबे घरों को देखकर गांववाले रोने को मजबूर है।
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अग्निकांड के दूसरे दिन सोमवार को सुबह करीब सात बजे प्रभावित परिवारों के सदस्य सोकर उठे तो देखा राख बन चुके उनके मकान अब बर्फ में दब चुके थे। बर्फबारी के बीच अपने जले हुए आशियानों को देखने जैसे ही बाहर निकले तो देखा जले हुए आशियानों की राख के ढेर पर बर्फ की सफेद चादर बिछी हुई है। इस मंजर को देख परिवार के सदस्य अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए।
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सर्द मौसम में प्रभावित पशुओं को घरों के बरामदे के नीचे आसरा दिया हुआ है। प्रभावित परिवारों की महिलाएं बर्फबारी के बीच ही पशुओं के लिए घास की व्यवस्था कर रही हैं। कड़ाके की ठंड के बीच पूरा गांव ठिठुरने को मजबूर है। एक दिन पहले हुए अग्निकांड में शिमला का तांगणू गांव जलकर राख हो गया था। दूसरे ही दिन यहां भारी बर्फबारी शुरू हो गई। अब लोगों के पास तन के कपड़े के ‌अलावा सर्दी से बचने का कोई और साधन भी नहीं है।

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सुबह नौ बजे गांव में बर्फबारी के बीच लोगों ने एकत्र होकर दोपहर के खाने की व्यवस्था करना शुरू कर दी। इसके लिए एक जगह से बर्फ हटाकर एक तंबू लगाया गया। इसके बाद पूरे गांव के लिए खाना बनकर तैयार हुआ। हालत यह है कि खाने के लिए अनाज भी दूसरे गांव के लोग दे रहे हैं। लोगों का अपना अनाज घरों के साथ ही खाक हो गया।
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि राज्य सरकार शिमला जिले की रोहड़ू तहसील के गांव बानवाड़ी (तांगनू) के सभी प्रभावित परिवारों के लिए उचित पुनर्वास के लिए हरसंभव मदद देगी। वीरभद्र ने कहा कि वह निजी तौर पर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और शीघ्र ही आगजनी से प्रभावित परिवारों को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि उनके स्थायी पुनर्वास तक किसी प्रकार की कठिनाई न आए, वह लगातार जिला प्रशासन से इसका फीडबैक ले रहे हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक दुखद घटना है और प्रभावित लोगों को इससे उबरने में समय लगेगा। राज्य सरकार की ओर से यथासंभव आवश्यक राहत प्रदान करने में किसी प्रकार की देरी न हो, इस बात को सुनिश्चित करेंगे। उपायुक्त शिमला ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि आगजनी से प्रभावित 48 परिवारों को प्रति परिवार प्रत्येक को 40000-40000 रुपये की फौरी राहत प्रदान की गई है। सभी प्रभावित परिवारों को भोजन की माकूल व्यवस्था की गई है और पर्याप्त मात्रा में दाल, चावल, खाद्य तेल, वर्तन, एलपीजी सिलेंडर, रेगुलेटर, स्टोव आदि के अलावा रजाइयां, चादरें, कंबल आदि भी उपलब्ध करवाए गए हैं।
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स्थानीय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में प्रभावित परिवारों के ठहरने की अस्थायी व्यवस्था कर दी गई है। उधर, डीसी शिमला ने अवगत करवाया कि रोहडू के एसडीएम घटना के तुरंत बाद अधिकारियों की टीम सहित मौके पर पहुंच गए थे और वे आज भी राहत कार्यों को देख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत मैनुअल के आधार पर शेष राशि शीघ्र उपलब्ध करवाने के जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं।

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मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विपरीत मौसम की परिस्थितियों के बावजूद प्रभावित गांव के लिए सड़क संपर्क को खुला रखने के प्रयास किए जाए, जिससे राहत कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार इंदिरा आवास योजना तथा राजीव आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए वित्तीय सहायता तथा वन विभाग की ओर से टीडी प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों की ओर से पीड़ितों की सहायता करने के लिये उनकी सराहना की है।    

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तांगणू (बेनवाड़ी) के अग्निकांड प्रभावितों के लिए पंचायत के दूसरे गांव के लोग एकजुट हो गए हैं। थांईटवाड़ी व चेंईटवाड़ी के ग्रामीणों ने अग्निकांड पीड़ितों के को अपने-अपने घरों में पनाह दी है। कुछ प्रभावित परिवारों को तांगणू (बेनवाड़ी) में ही आग से बचे घरों में शरण दी गई है। प्रभावित परिवारों के लिए अभी भी ग्रामीण सामूहिक रूप से खाना पका रहे हैं।

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दुख की इस घड़ी में जहां अग्निकांड पीड़ितों को छत छिन जाने का गम था, वहीं सर्द रातें तिरपाल के नीचे गुजारने की चिंता भी बढ़ गई थी। लेकिन तांगणू के थांईटवाड़ी व चेंईटवाड़ी गांव ने प्रभावितों को अपने-अपने घरों में शरण देकर एकता की मिसाल पेश की है। साथ ही मानवता का परिचय दिया है। ग्रामीण एकजुट होकर प्रभावितों की हर संभव सहयोग करने की कोशिश कर रहे हैं।
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तांगणू जांगलिख पंचायत के प्रधान भगत चंद गुप्ता ने बताया कि प्रभावित परिवारों के मदद के लिए स्थानीय ग्रामीण दिन-रात कार्य कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों को ग्रामीणों ने अपने-अपने घरों में शरण दी है। सर्दियों के मौसम में तिरपाल के नीचे रात गुजारना प्रभावितों के लिए संभव नही था। उन्होंने बताया कि दुख की इस घड़ी है पुरी पंचायत से लोग बेनवाड़ी गांव के प्रभावितों के साथ खड़े हैं।

 
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