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सपूतों की शहादत पर बेटियों के साथ फूट-फूट कर रोया पूरा गांव

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पठानकोट में वायुसेना के एयरबेस में आंतकियों से लोहा लेते शहीद हुए हिमाचल के कांगड़ा जिले की शाहपुर तहसील के छतड़ी के सिहुवां गांव के संजीवन कुमार राणा और चंबा जिले के भटियात की बलाणा पंचायत के बासा गांव के जगदीश चंद का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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सीने में पांच गोलियां खाकर भी डटे रहे संजीवन- संजीवन राणा ने सीने में पांच गोलियां लगने के बाद भी दुश्मनों को डटकर सामना किया। बुरी तरह से घायल संजीवन राणा को सैन्य अस्पताल लाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया था। शहीद संजीवन के परिजनों सहित सिहुवां और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे हजारों लोगों ने शहीद को अंतिम विदाई दी। शहीद को उनके बेटे ने मुख्याग्रि दी। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, निहत्थे जगदीश ने आतंकवादी से उलझकर छीन ली थी उसकी रायफल
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अंतिम संस्कार से पहले घर में शहीद की पार्थिव देह अंतिम दर्शनों के लिए रखी गई। पार्थिव देह पास पहुंच कर पत्नी पिंकी देवी की आंखों से बरबस आंसू बहने लगे। बच्चे भी बिलख बिलख कर रोने लगे। पत्नी पिंकी देवी शहीद की पार्थिव देह से लिपटकर रोने लगी। ऐसे में माहौल बेहद मार्मिक हो गया।

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पंजाब रेजिमेंट के कर्नल सुधीर टोकर ने शहीद को सलामी दी और सैनिकों ने एक साथ हवा में गोलियां दाग कर श्रद्धाजंलि दी। हिमाचल सरकार की ओर से खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं परिवहन मंत्री जीएस बाली, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. कर्नल धनीराम शांडिल, मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती, विधायक सरवीण चौधरी, खेल पर्यावरण एवं सांस्कृतिक एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह ने शहीद संजीवन राणा को श्रद्धांजलि दी।
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राज्य पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष मेजर विजय सिंह मनकोटिया, अन्य पिछड़ा वर्ग वित्त आयोग के अध्यक्ष चंद्र कुमार, वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया, प्रदेश कांग्रेस सचिव रघुबीर बाली, उपायुक्त कांगड़ा रितेश चौहान, एसपी अभिषेक दुल्लर, डीएसपी हितेश लखनपाल, एसडीएम श्रवण मांटा और सेना के अधिकारियों ने भी अंतिम संस्कार में शहीद संजीवन राणा को श्रद्धांजलि दी।
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20 लाख देगी प्रदेश सरकार- इस दौरान जीएस बाली ने शहीद के शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि शहीद के परिजनों को प्रदेश सरकार की ओर से 20 लाख रुपये दिए जाएंगे। शहीद संजीवन राणा पर पूरे राष्ट्र को गर्व है। उनके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता।
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शहीद के नाम पर श्मशानघाट- जीएस बाली ने संबंधित अधिकारियों को सिहुवां गावं के शमशानघाट और मार्ग के सुधारीकरण कार्य के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए प्रदेश सरकार की ओर से 3 लाख रुपये दिए जाएंगे। श्मशानघाट का नाम शहीद के नाम पर रखा जाएगा। डा. कर्नल धनीराम शांडिल ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदनाएं जताई। उन्होंने कहा कि देश संजीवन राणा की बहादुरी एवं शहादत का सलाम करता है।

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बचपन में बड़े शांत स्वाभाव के थे संजीवन- शहीद संजीवन के बचपन के दोस्तों बलवीर कुमार, वरियाम सिंह, अमी चंद, रजिंद्र कुमार ने बताया की स्कूल की पढ़ाई के दौरान संजीवन राणा बहुत ही शांत स्वभाव के थे। पिता रतन चंद के साथ मेलों में वह कुश्तियों में जाकर भाग लेते थे। प्रदेश कुश्ती संघ के सचिव व जिला कुश्ती संघ के अध्यक्ष राकेश सनौरिया ने कहा कि पहलवानी में संजीवन वीरों के वीर थे। संजीवन पंजाब के नामी पहलवानों को चित कर चुके थे। रिपोर्ट: विक्रम मेहरा, लंज (कांगड़ा)

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1996 में दुश्मनों को चटाई दी धूल- वहीं, शहादत का जाम पीने वाले संजीवन कुमार राणा के साथ नौकरी करने वाले रजिंद्र कुमार ने बताया कि 1996 में श्रीनगर के अनंतनाग में उनके काफिले पर आंतकवादियों ने गरनेडों व हथियारों से हमला कर दिया था। इसमें संजीवन राणा बुरी तरह से जख्मी हुए थे लेकिन इस वीर पहलवान ने उसके बाद भी हार नहीं मानी थी व पूरी नौकरी करने के बाद फिर से देश सेवा में उतर आया था।

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उन्होंने कहा कि देश सेवा के लिए संजीवन तत्पर रहते थे। अनंतनाग में उनके काफिले पर हमला होने के बाद भी घायल अवस्था में संजीवन देश की सुरक्षा के लिए लड़ते रहे। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों का सफाया करने के बाद ही वह रण क्षेत्र से हटे थे।

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शहीद के पिता ने सरकार को कोसा- पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए संजीवन कुमार राणा के पिता रतन चंद ने अपने बेटे की मौत पर सरकारों को कोसा। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान गए थे। इसके बाद अब पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने आतंकी हमला कर दिया जिसमें उनका बेटा भी शहीद हुआ।

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उन्होंने कहा कि वह देश के लिए तीन बार लड़ाई लड़ चुके हैं। हर बार भारत से पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी है। अभी तक लाखों भारतीय सैनिकों को आतंकवादी मार चुके हैं मगर केंद्र सरकार कुछ भी नहीं कर रही है। भारतीय सैनिकों की वर्दी को कबाड़ियों को बेचा जा रहा है। यही कबाड़ी आतंकवादियों को वर्दियां बेच रहे हैं।

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उन्होंने आरोप लगाया कि आतंकवादी कश्मीरियों के भेस में फेरियां लगाकर तमाम जानकारियां पाकिस्तान तक पहुंचा रहे हैं।

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उनका बेटा 1982 में सेना में भर्ती हुआ था। इसके बाद वह देश की सेवा कर रहा था। भारत ने जितनी बार भी पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ मिलाया, उतनी ही बार आतंकियों ने भारतीय सैनिकों को मारा।

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शहीद के पिता ने कहा कि पाकिस्तान को सबक सिखाने का वक्त आ गया है। सरकार को अब फैसला लेना चाहिए।

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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने पठानकोट एयरबेस हमले में शहीद हुए कांगड़ा जिले की शाहपुर तहसील के सिहवां गांव के हवलदार संजीवन सिंह राणा और चंबा जिले की सिंहुता तहसील के गोला गांव के हवलदार जगदीश चंद की मृत्यु पर शोक प्रकट किया है।

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उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति तथा शोक संतप्त परिवारों को इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। कहा कि राष्ट्र इन जवानों के बलिदान के प्रति उनका ऋणी रहेगा।

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शहीद को श्रद्घाजंलि देते सेना के अफसर।

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विलाप करते हुए शहीद संजीवन की पत्नी।

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संजीवन तुम अमर रहो के नारों से गूंजा पूरा गांव।

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निहत्थे जगदीश ने आतंकवादी से उलझकर छीन ली थी उसकी रायफल- डीएसआर में तैनात जगदीश चंद आतंकवादी हमले के दौरान मैस में चाय बना रहा था।

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आतंकवादियों ने मैस में बिजली जलती देख उस पर हमला बोल दिया। जगदीश मैस से निहत्था ही बाहर निकल आया और वहां मौजूद एक आतंकवादी से उलझ गया।

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इस आतंकवादी के साथ मारपीट के दौरान जगदीश ने उसकी रायफल छीन ली और उस पर तीन राउंड फायर कर दिए। गोली लगने से आतंकवादी तो वहीं ढेर हो गया, लेकिन उसके एक दूसरे साथी ने जगदीश चंद पर जवाबी हमला बोल दिया।

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इस हमले में जगदीश चंद को गोली लग गई और वो शहीद हो गया लेकिन तब तक आतंकवादियों के मंसूबे की जानकारी पूरी यूनिट को मिल चुकी थी और सुरक्षा बल ने मोर्चा संभाल लिया था।

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इससे आतंकवादी अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए। बताया जा रहा है कि यदि जगदीश चंद मैस में नहीं होता तो आतंकवादी गुपचुप तरीके से रिहायशी इमारत या एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों के बेड़े तक पहुंच सकते थे, लेकिन जगदीश की सूझबूझ और शहादत से आतंकवादियों की मौजूदगी का खुलासा समय रहते हो गया।

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जगदीश चंद को अंतिम विदाई देने पहुंची उपायुक्त एम सुधा देवी ने शहादत को सलाम किया है। उन्होंने बताया कि वीर सुपूत ने जान देकर आतंकवादियों के एक बड़े मिशन को रोक लिया।

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सैकड़ों नम आंखों के बीच चंबा के सुपूत जगदीश चंद का पार्थिव शरीर जब उसके पैतृक गांव पहुंचा तो पूरा गांव जगदीश तुम अमर रहो के नारे से गूंज उठा। बासा गांव में हर कोई शहीद की अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए तैयार था। रिपोर्ट: नागेश पठानिया, सिहुंता (चंबा)

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सुबह से ही लोग जगदीश चंद के घर पहुंचना शुरू हो गए थे, लेकिन जगदीश का पार्थिव शरीर दोपहर बाद करीब तीन बजे के बाद उसके घर पहुंचा। इसके बाद उसे अंतिम दर्शनों के लिए घर के आंगन में रखा गया जहां लोगों ने इस वीर सुपूत के अंतिम दर्शन किए।

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तीन दिन भूखा प्यासा रहा परिवार- बासा में मौजूद लोगों की आंखों में आंसू थे पर आतंकवाद के खिलाफ भड़ास भी जमकर निकल रही थी। लोग इस बात से भी नाराज थे कि जगदीश चंद को तीन दिन के बाद घर पहुंचाया गया। जबकि उनकी मौत शनिवार को ही हो गई थी। तीन दिन से पूरा परिवार बिना कुछ खाए-पीए पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहा था।

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जब उन्होंने पठानकोट पहुंचकर शव हासिल करने की इच्छा जताई तो सैन्य अधिकारियों ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया था। जगदीश चंद को अंतिम विदाई देने योल से गोरखा रेजीमेंट के जवान पहुंचे थे। इन जवानों ने शहादत चूमने वाले जगदीश चंद को सलामी दी। इस मौके पर सरकार की तरफ से वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, उपायुक्त एम सुधा देवी, विधायक सरवीण चौधरी समेत अन्य मौजूद रहे।

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कहते थे कुछ हट के करूंगा, कर दिखाया- हमेशा कहते थे कुछ हटके करूंगा और वो उन्होंने कर दिखाया। सोमवार को शहीद की पत्नी स्नेहलता की आंखों में आंसू रुक नहीं रहे थे लेकिन बीच-बीच में शहादत को सलाम करते शब्द भी वो बोल रही थीं। उन्हें मालूम था कि उनके पति अब लौटकर नहीं आएंगे लेकिन अंतिम विदाई से पहले वो उन्हें अमर होता देख रही थी। कपिल डोगरा, चुवाड़ी (चंबा)

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शहीद की पत्नी स्नेहलता ने कहा कि उनके बच्चों के सिर से बाप का साया उठ गया है, लेकिन भारत माता को दिए सर्वोच्च बलिदान की वजह से उनके पति अमर हो गए हैं। वे हमेशा कहते थे कि कुछ अलग करूंगा और वो उन्होंने कर दिखाया है। हमें उम्र भर उनकी इस शहादत पर गर्व रहेगा।

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प्रशासन ने दिए पांच लाख- जगदीश चंद के परिवार का दुख बंटाने के लिए सोमवार को हर कोई पहुंचा था। इसमें वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी प्रदेश सरकार की ओर से आए थे। जबकि उपायुक्त एम सुधा देवी प्रशासन की ओर से। उपायुक्त ने शहीद जगदीश के परिजनों को प्रशासन की ओर से पांच लाख रुपये की फौरी राहत राशि प्रदान की गई है।

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इसके अलावा वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने शहीद के घर तक बने कच्चे रास्ते को पक्का करने का आश्वासन दिया है। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद के पैतृक गांव जाकर उसके पार्थिव शरीर को श्रद्घांजलि दी।

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शहीद जगदीश के पीछे उनकी तीन बेटियां, एक लड़का और पत्नी रह गएं हैं। शहीद के परिवार ने उनकी शहादत पर गर्व किया है। पठानकोट एयरबेस में हुए आतंकी हमले के दौरान निहत्थे होने के बावजूद हवलदार जगदीश चंद ने एक आतंकी को मार गिराया। शहीद जगदीश चंद की शहादत पर पूरे गांव ने फक्र जताया है।

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शहीद संजीवन की पा‌र्थिव देह घर पहुंचते ही उनकी बेटियां बिलख-बिलख कर रोने लगीं। ऐसे में माहौल बेहद मार्मिक हो गया। हर किसी की आंखों में आंसू आ गए।
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