हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की सराज घाटी में फागली उत्सव धूमधाम से मनाया गया। पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए इस दौरान देव व राक्षस का युद्ध हुआ, जिसमें देवताओं की जीत हुई। रात के समय लोगों ने राख फेंक कर बुरी शक्तियां भगाईं। बंजार घाटी में कई स्थानों पर आजकल फागली पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला
फागली में लोगों ने कांटेदार झाड़ियों पर नंगे पांव से नृत्य किया। सराज घाटी में देव शक्ति का प्रदर्शन हुआ। इससे पहले घाटी के विभिन्न गांव में लोगों ने कांटेदार झाड़ियां एकत्रित की।
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इस पर देव गूर व मुखौटे पहने लोगों ने नंगे पांव नृत्य कर परंपरा निभाई। देव शक्ति के कारण किसी को कुछ नहीं हुआ। बंजार घाटी में फाल्गुन महीने में सदियों पुराना फागली उत्सव मनाया जा रहा है।
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ग्रामीण आशीष, भगवान सिंह, गुड्डू, दिनेश, मोहर सिंह, निका राम तथा तुलसी ने कहा कि बंजार घाटी के गांव रोपा, तांदी, सजवाड़, बेहलों, टील तथा उपमंडल के गई अन्य गांवों में फागली उत्सव की धूम रही।
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मान्यता है कि उत्सव में राख फेंकने से बुरी शक्तियों से छुटकारा मिलता है। ढोल-नगाड़ों व करनाल की स्वरलहरियों से पूरी बंजार घाटी गूंजी। जिले में किन्नौर के लोग फागली पर्व मना रहे हैं।
बता दें कुल्लू के उपमंडल बंजार में देवता विष्णु नारायण के सम्मान में मनाए जाने वाली फागली में देव परंपराओं का निर्वहन के साथ मुखौटों के साथ नृत्य आकर्षण का केंद्र रहता है। परंपरा है कि इस दौरान अश्लील गालियां देकर बुरी शक्तियों को भी भगाया जाता है।।