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तस्वीरें: मेले में बिगड़ गए जब भैंसे, देखिए एक-एक कर आया सबका नंबर

Sun, 17 Sep 2017 12:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मेले में एकाएक हड़कंप मच गया जब भैंसे बिगड़ गए। इसके बाद सबका नंबर आया और मेले में अफरातफरी मच गई। कोई मेरी बेटी को बचाओ, चिल्लाती रही मां। शिमला के मशोबरा में हुए सायर मेले में भैंसों की लड़ाई के दौरान यह सब हुआ।

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सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद शिमला के मशोबरा में हुए सायर मेले में झोटों की लड़ाई करवाई गई। जिला प्रशासन की चेतावनी के बावजूद मेला कमेटी ने आयोजन करवाया। कुसुम्पटी से कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह ने भी बेजुबान जानवरों की लड़ाई का खूब आनंद लिया। हजारों की भीड़ जुटी हुई थी। अमर उजाला ‌के फोटोग्राफर नरेश भारद्वाज सायर उत्सव के दौरान जब भैंसों की लड़ाई के फोटो लेने लगे तो मेला कमेटी के लोगों ने पहले उन्हें धमकाया और फिर मारपीट करने पर उतारू हो गए। कसुम्पटी के विधायक अनिरुद्ध सिंह की मौजूदगी में यह सब हुआ। बाद में उन्होंने इसके लिए मीडिया से माफी मांगी।

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पहले तो मनोरंजन होता रहा, लेकिन एकाएक झोटे बेकाबू हो गए भीड़ में घुस गए। भगदड़ मच गई। इसमें एक दर्जन लोग चोटिल हो गए। एक झोटे ने रस्सी पकड़े युवक को पटक-पटक कर फेंका। उसके पैर में रस्सी भी फंस गई थी। कड़ी मशक्कत से उसे बचाया गया। इसके बाद झोटा भीड़ में घुस गया। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे इधर-उधर भागते रहे।

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मेला आयोजकों ने डंडों के सहारे मात्र एक रस्सी का घेरा बनाया था जो सुरक्षा पर सवाल उठा रहा है। जिला प्रशासन को इस मेले के आयोजन की पहले से सूचना थी, बावजूद इसके मेले में पुलिस तक की व्यवस्था नहीं की गई थी। सूत्र बताते हैं कि लड़ाई से पहले झोटों को शराब पिलाई जाती है।

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कोई मेरी बेटी को बचाओ, चिल्लाती रही मां- मशोबरा के तलाई मैदान में झोटों की लड़ाई के दौरान बेकाबू झोटा लोगों की भीड़ की तरफ भाग गया। भीड़ की तरफ भागते हुए लोगों में भगदड़ मच गई। एक मां ने जब देखा की उसकी बेटी झोटे की चपेट में आने वाली है तो वह जोर जोर से चिल्लाने लगी कोई मेरी बेटी को बचाओ झोटा उसे मार देगा।
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विधायक का बेतुका बयान- झोटों की लड़ाई पर विधायक अनिरुद्ध सिंह का कहना है कि तलाई में माता का मंदिर है। हर साल यहां पूजा होती है। शनिवार को भी पूजा आयोजित की गई। मेला स्थल पर झोटों की प्रदर्शनी लगाई गई थी, लड़ाई नहीं करवाई गई। मंदिर कमेटी सदस्य नरेंद्र कंवर ने लड़ाई से इंकार किया।

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कुदरत ने दी नई जिंदगी- मेले में मची भगदड़ के दौरान बेकाबू झोटा लोगों की भीड़ में घुस गया और भीड़ को पैरों तले रौंदना शुरू कर दिया। सामने दिखाई देने वाले शख्स को झोटे ने अपने सिर से पटकना शुरू कर दिया। इसी बीच मेले देखने पहुंचा एक स्थानीय युवक झोटे की चपेट में आ गया और झोटे ने उसे अपने पांव तले रौंद दिया। जैसे ही झोटा उसे रौंदने के बाद आगे बढ़ा, युवक और लोगों के मुंह से एक ही शब्द निकला कि कुदरत ने इसे नई जिंदगी दे दी।

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शराब पिलाकर करवाते हैं झोटे की लड़ाई- मेले में मौजूद लोगों में यह बात चर्चा का विषय बनी हुई थी कि बड़े सींग वाले झोटे को ज्यादा नशा लग गया है। लोगों का कहना था कि झोटों को लड़ाई से पहले शराब पिलाई गई है। शराब के नशे में ही झोटों की लड़ाई करवाई जाती है।

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बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों का मेला आना होगा मुश्किल- तलाई मेले में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का आना मुश्किल हो गया है। वहां पर मौजूद लोगों का कहना था कि हम यहां पर मंदिर में माता के दर्शन करने आते हैं। अगर इसी तरह से मेले में झोटों की लड़ाई होती रही तो मेले में उनका आना  मुश्किल हो जाएगा।
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2014 में सुप्रीम कोर्ट लगा चुका है प्रतिबंध- मशोबरा के तलाई में काली माता को खुश करने के नाम पर सदियों से भैंसों की लड़ाई करवाई जाती रही है। तीन साल पहले मई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने बैलगाड़ी रेस और जानवरों की लड़ाई पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। कोर्ट ने इसे परंपराओं के नाम पर पशुओं के प्रति क्रूरता करार दिया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने भी इस प्रकार के आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। तीन साल तक इस मेले में झोटों की लड़ाई नहीं हुई, लेकिन इस बार जबरन आयोजन करवा दिया गया।
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