डॉ. ज्योति आत्महत्या मामले में नया मोड़ आ गया है। एसआईटी की जांच में पुलिस की पूरी की पूरी थ्योरी उल्टी पड़ गई। एसआईटी टीम ने ज्योति के कमरे से एक लैपटॉप, मैमोरी कार्ड, डायरी के फटे हुए पन्ने, किसी अन्य व्यक्ति के नाम से कटे मोबाइल फोन के बरामद किए हैं।
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पुलिस हालांकि पहले दावा कर ही थी कि ज्योति के कमरे से पुलिस को कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली है। लेकिन वीरवार एसआईटी की टीम मौके पर पहुंची तो पुलिस के दावों की पोल खुल गई।
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एसआईटी ने साक्ष्य जुटाने के बाद अब डायरी से फाड़े गए पन्नों को जोड़कर छानबीन शुरू कर दी है। ज्योति के कमरे से मिली शराब की बोतल को पहले ही एफएसएल जांच के लिए भेजा जा चुका है। एसपी अंजुम आरा के आदेशों के बाद एसआईटी की टीम डीएसपी घुमारवीं राजेश कुमार की अगुवाई में टीम देर रात तक मौके पर जांच में जुटी रही।
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वहीं ज्योति के भाई आशीष ठाकुर ने बताया कि पुलिस ने पहले उनकी बहन के कमरे से कुछ भी महत्वपूर्ण बरामद नहीं होने की बात कही थी। किसी ने भी कमरे में कोई छेड़छाड़ नहीं की। एसआईटी के आने पर लैपटॉप, मैमोरी कार्ड, डायरी से फटे पन्नों समेत अन्य सामान का मिलना पुलिस के दावों की पोल खोलता है।
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उन्होंने कहा कि डायरी के पन्ने क्यों, किसने और कब फाड़े हैं? इस सवाल का जवाब ढूंढना होगा। इसी तरह से पहले कमरे में लैपटॉप नहीं होने की बात की गई थी लेकिन अब उसे बरामद किया गया है। अब सवाल उठता है कि अचानक लैपटॉप कैसे कमरें में आया या फिर कहीं बाद में तो नहीं छोड़ा गया।
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दीगर है कि सोशल मीडिया में कमरे का जो फोटो वायरल हुआ था उसमें कमरे की हालत सामान्य थी। लेकिन जब माता पिता मौके पर पहुंचे उस वक्त सामान बिखरा पड़ा था। जबकि पुलिस का कहना है कि उन्होंने किसी वस्तु को एफएसएल की टीम के आने से पहले हाथ नहीं लगाया था।
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ऐसे में सवाल उठता है कि एफएसल की टीम दोपर बाद पहुंची है लेकिन उसके पहले सामान बिखरा पड़ा था। सोशल मीडिया में वायरल फोटो डॉक्टरों के व्हाट्सऐप ग्रुप में कैसे पहुंचा यह भी पुलिस के लिए एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
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वहीं सोशल मीडिया में जिस नेता का हवाला दिया जा रहा था उसकी पहचान का भी सवाल खड़ा हो गया है। ज्योति के भाई आशीष ठाकुर व पिता राम चंद ठाकुर का कहना है कि उन्हें पुलिस ने घटना वाले दिन गुमराह किया गया था।
ये है मामला- हिमाचल के बिलासपुर अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट पद पर तैनात ज्योति का शव उसके किराये के कमरे में फंदे से झूलता मिला था। पुलिस ने आत्महत्या को उकसाने की धारा के तहत केस दर्ज किया था लेकिन परिजनों ने मौत को हत्या करार दिया था। पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कई विरोध प्रदर्शन भी हुए। इसी दबाव की वजह से बाद में जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित कर दी गई।