कर लीजिए बर्फबारी में मस्ती की तैयारी, खुलने वाला है मनाली लेह मार्ग
Fri, 22 Apr 2016 11:11 AM IST
अशोक राणा/अमर उजाला, केलांग (लाहौल स्पीति)
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यदि आप भी झुलसती गर्मी से राहत पाना चाहते हैं तो जल्द तैयारी कर लीजिए। रोहतांग के बाद अब मनाली लेह मार्ग भी खुलने वाला है। इस महीने के आखिर तक पर्यटकों और सेना के लिए मनाली-लेह सामरिक सड़क मार्ग बहाल हो सकता है। ऐसे में बर्फ के नजारों के बीच आप भी छुट्टियों का मजा ले सकते हैं।
- फोटो : अशोक राणा केलांग (लाहौल स्पीति)
यदि आप भी झुलसती गर्मी से राहत पाना चाहते हैं तो जल्द तैयारी कर लीजिए। रोहतांग के बाद अब मनाली लेह मार्ग भी खुलने वाला है। इस महीने के आखिर तक पर्यटकों और सेना के लिए मनाली-लेह सामरिक सड़क मार्ग बहाल हो सकता है। ऐसे में बर्फ के नजारों के बीच आप भी छुट्टियों का मजा ले सकते हैं।
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जवान माइनस 30 डिग्री तापमान में भी बर्फ हटाने के लिए पसीना बहा रहे हैं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) दीपक प्रोजेक्ट विंग के जवान बर्फीले तूफान के बीच सोमवार रात भी राहनीनाला में हिमखंड हटाने में जुटे रहे। इस सड़क के खुलते ही हर साल यहां सैलानियों का जमावड़ा लग जाता है।
- फोटो : अशोक राणा केलांग (लाहौल स्पीति)
जवान माइनस 30 डिग्री तापमान में भी बर्फ हटाने के लिए पसीना बहा रहे हैं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) दीपक प्रोजेक्ट विंग के जवान बर्फीले तूफान के बीच सोमवार रात भी राहनीनाला में हिमखंड हटाने में जुटे रहे। इस सड़क के खुलते ही हर साल यहां सैलानियों का जमावड़ा लग जाता है।
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रोहतांग फतह के बाद बीआरओ ने अब 16000 फुट ऊंचे बारालाचा दर्रा पर चढ़ाई शुरू कर दी है। 484 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह सामरिक सड़क मार्ग को बहाल करने में बीआरओ की चुनौतियां बॉर्डर में युद्ध लड़ने से कम नहीं हैं। दीपक प्रोजेक्ट के पास मनाली से सरचू तक करीब 300 किलोमीटर लंबे सामरिक मार्ग के रखरखाव का जिम्मा है।
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रोहतांग फतह के बाद बीआरओ ने अब 16000 फुट ऊंचे बारालाचा दर्रा पर चढ़ाई शुरू कर दी है। 484 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह सामरिक सड़क मार्ग को बहाल करने में बीआरओ की चुनौतियां बॉर्डर में युद्ध लड़ने से कम नहीं हैं। दीपक प्रोजेक्ट के पास मनाली से सरचू तक करीब 300 किलोमीटर लंबे सामरिक मार्ग के रखरखाव का जिम्मा है।
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मनाली-लेह मार्ग देश का ऐसा इकलौता सामरिक मार्ग है जिसमें 13000 से 18000 फुट ऊंचाई तक के करीब चार दर्रे आते हैं। बर्फबारी के कारण इन दर्रों में औसत 40 से 70 फुट तक मोटी बर्फ की दीवारें खड़ी हो गई हैं। जवानों को हिमखंड गिरने के खतरे के साथ 80 किलोमीटर गति से चलने वाले बर्फीले तूफान का रोज सामना करना पड़ रहा है।
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मनाली-लेह मार्ग देश का ऐसा इकलौता सामरिक मार्ग है जिसमें 13000 से 18000 फुट ऊंचाई तक के करीब चार दर्रे आते हैं। बर्फबारी के कारण इन दर्रों में औसत 40 से 70 फुट तक मोटी बर्फ की दीवारें खड़ी हो गई हैं। जवानों को हिमखंड गिरने के खतरे के साथ 80 किलोमीटर गति से चलने वाले बर्फीले तूफान का रोज सामना करना पड़ रहा है।
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अमर उजाला ने रोहतांग दर्रा पहुंचकर बीआरओ के काम का जायजा लिया तो बीआरटीएफ के कमांडर कर्नल केपी राजेंद्र ने बताया कि रोहतांग जैसे दर्रों पर बर्फ से निपटना किसी जंग से कम नहीं है। केपी राजेंद्र को उम्मीद है कि अप्रैल अंत तक मनाली-लेह सामरिक मार्ग को सेना के वाहनों के साथ पर्यटकों के लिए भी खोल दिया जाएगा।
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अमर उजाला ने रोहतांग दर्रा पहुंचकर बीआरओ के काम का जायजा लिया तो बीआरटीएफ के कमांडर कर्नल केपी राजेंद्र ने बताया कि रोहतांग जैसे दर्रों पर बर्फ से निपटना किसी जंग से कम नहीं है। केपी राजेंद्र को उम्मीद है कि अप्रैल अंत तक मनाली-लेह सामरिक मार्ग को सेना के वाहनों के साथ पर्यटकों के लिए भी खोल दिया जाएगा।