ब्रिटिश शासन की बेड़ियों से भारत को स्वतंत्र करवाने के लिए असंख्य युवाओं ने स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, खुदीराम बोस जैसे युवा देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान दे गए। ऐसे ही हिमाचल प्रदेश से एक वीर सपूत राम वजीर राम सिंह पठानिया हुए हैं, जिन्होंने 21 साल की छोटी सी उम्र में ही ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजा दिया था। महज 24 वर्ष की उम्र में भारत माता के लिए स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में प्राणों की आहुति देकर अमर हो गए।
11 नवंबर, 1849 को देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने की जो परंपरा राम सिंह पठानिया ने शुरू की थी। उससे आज भी हिमाचल खासकर कांगड़ा के युवा न केवल रोमांचित होते हैं, बल्कि सेना में भर्ती होकर देश के प्रति सर्वोच्च बलिदान तक देकर आगे बढ़ा रहे हैं। इसी परंपरा के कारण हिमाचल प्रदेश को वीरभूमि के नाम से भी जाना जाता है।