हिमाचल के भोरंज उपचुनाव में लगातार सातवीं बार कांग्रेस पार्टी चुनाव हार गई। सीएम वीरभद्र की तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी जीत का स्वाद नहीं चख सकी। हार के लिए काफी हद तक कांग्रेस खुद भी जिम्मेदार रही। आइए जानते हैं कि आखिर इस बार भी क्यों कांग्रेस यहां पिछड़ गई।
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1. चुनाव में कांग्रेस की गुटबाजी साफ देखने को मिली। चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी रैली में पार्टी के दिग्गज नेता एक साथ मंच पर नहीं दिखे। इसी गुटबाजी का फायदा भाजपा को मिला।
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2. भोरंज हमेशा से ही भाजपा का गढ़ रहा। यहां लगातार छह बार पूर्व शिक्षा मंत्री आईडी धीमान भाजपा के लिए चुनाव जीते थे। ऐसे में यहां पहले से ही भाजपा का तगड़ा वोट बैंक था जिसमें कांग्रेस सेंध नहीं लगा पाई।
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3. माना ये भी जा रहा है कि कुछ पंचायतें जिनका विलय भोरंज विधानसभा क्षेत्र में हुआ है, वे पहले भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल के विधानसभा क्षेत्र के तहत आती थी। इनमें भाजपा वोटरों की संख्या ज्यादा थी और इसी वजह से भाजपा को शुरुआती लीड भी मिली।
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4. कांग्रेस ने ऐन मौके पर अपने प्रत्याशी का टिकट भी कैंसिल कर दिया था। पहले यहां से प्रेम कौशल उम्मीदवार थे मगर नामांकन से ठीक पहले उनका टिकट कैंसिल कर प्रोमिला देवी को उम्मीवार बनाया गया। इससे दूसरे गुट के समर्थक नाराज भी हो गए थे।
5. मोदी लहर भी भाजपा के काम आई। साथ ही चुनाव को लेकर पार्टी ने तगड़ी रणनीति बनाई जबकि कांग्रेस इस मामले में पिछड़ गई। सरकार होते हुए भी पार्टी वोटरों को नहीं रिझा पाई। शुरुआती चुनाव प्रचार में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने दूरी भी बनाए रखी।