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हिमाचल में हर साल 2500 विद्यार्थियों को मिलेगी नौकरी, जानिए पूरा मामला

Tue, 06 Nov 2018 12:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश के दस डिग्री कॉलेजों में उत्कृष्ट एवं दक्षता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के जरिये प्रति वर्ष 2500 छात्रों को रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। भाजपा के दृष्टिपत्र में की गई घोषणा को पूरा करते हुए हिमाचल सरकार ने कॉलेजों में विशेष केंद्र खोलने का फैसला लिया है। इन केंद्रों के माध्यम से बड़ी कंपनियों में विद्यार्थियों को प्लेसमेंट दिलाई जाएगी। कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। युवाओें को निजी क्षेत्र में नौकरियों की संभावनाओं की राह दिखाने के लिए केंद्र खोलने का फैसला लिया गया है।
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युवाओें को निजी क्षेत्र में नौकरियों की संभावनाओं की राह दिखाने के लिए केंद्र खोलने का फैसला लिया गया है। इन केंद्रों में छात्राें की कैरियर काउंसलिंग की जाएगी। छात्रों को आईडी के साथ रजिस्टर करने के बाद उन्हें उनकी दिलचस्पी के हिसाब से ट्रेनिंग के लिए भेेजा जाएगा। निजी कंपनियों के उच्च अधिकारियों को कॉलेजों में बुलाकर रोजगार लेने के टिप्स दिए जाएंगे। देश व विदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित उद्योगों की जरूरतों के हिसाब से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
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इस योजना के तहत प्रतिवर्ष 2500 विद्यार्थियों को रोजगार प्रदान करने और 500 विद्यार्र्थियों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रारंभिक चरण में दस कॉलेजों से शुरूआत कर प्रदेश के सभी कॉलेजों को चरणबद्ध तरीके से इससे जोड़ा जाएगा। राज्य परियोजना अवलोकन एवं नवीन प्रयास इकाई के तहत शिक्षा विभाग उत्कृष्ट एवं दक्षता केंद्र स्थापित करेगा।

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उत्कृष्ट एवं दक्षता केंद्रों को कोटशेरा, नालागढ़, पावंटा साहिब, नादौन, धर्मशाला, मंडी, ऊना, बिलासपुर, संजौली और सोलन कॉलेज में खोला जाएगा।मंत्रिमंडल ने राज्य लोकसेवा आयोग के माध्यम से प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में 25 प्रिंसिपलों की सीधी भर्ती करने का फैसला भी लिया है। इसके अलावा प्रिंसिपलों के अन्य पद पदोन्नति से भरे जाएंगे।
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राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत उच्च शिक्षा में गुणात्मकता लाने के लिए प्रदेश में हायर एजूकेशन काउंसिल गठित किया जाएगा। मंत्रिमंडल की बैठक में काउंसिल गठित करने को मंजूरी दी गई। शिक्षा पद्धति में सुधार आने और केंद्र सरकार से अधिक बजट लेने में काउंसिल की अहम भूमिका रहेगी। किसी शिक्षाविद् को काउंसिल का अध्यक्ष बनाया जाएगा। काउंसिल में शिक्षा मंत्री भी शामिल होंगे। संभावित है कि विधानसभा के शीत सत्र के दौरान हायर एजूकेशन काउंसिल का एक्ट भी पेश किया जाएगा।
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प्रदेश भर के सभी सरकारी और निजी कॉलेज, विश्वविद्यालय हायर एजूकेशन काउंसिल के दायरे में आएंगे। सभी शिक्षण संस्थानों में समितियां बनाई जाएंगी। राज्यों के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर हायर एजूकेशन काउंसिल का नियंत्रण रहेगा। शिक्षण संस्थानों में बोर्ड ऑफ  गवर्नेस और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट गठित होंगे। काउंसिल में चेयरमैन के अलावा मुख्य कार्यकारी, स्टेट प्रोजेक्ट आफिसर सहित 10 से 25 सदस्य होंगे। स्वास्थ्य शिक्षा, इंजीनियरिंग शिक्षा, नर्सिंग शिक्षा, आर्किटेक्चर शिक्षा, विधि शिक्षा और तकनीकी शिक्षा देने वाले शिक्षण संस्थानों को भी काउंसिल के दायरे में लाया जाएगा। 
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हायर एजूकेशन काउंसिल के यह होंगे कार्य
- प्रदेश में रूसा के क्रियान्वयन को लेकर रणनीति और योजना तैयार करना। मूल्यांकन और निगरानी करना। शैक्षणिक सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण तरीके से मुहैया करवाना। दिशा निर्देश और सलाह देना। रूसा के तहत फंडिंग कार्य करना।
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