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International Women Day 2024: महिलाओं के पास हैं ये कानूनी अधिकार, हर नारी को जरूर होना चाहिए पता

Fri, 08 Mar 2024 09:04 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिलाओं को दिए गए कानूनी अधिकारों के बारे में बताया जा रहा है, ताकि वह भी समाज में सम्मान और समान भाव के साथ रह सकें। 
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women rights new - फोटो : istock
International Women Day 2024 Women Rights in India अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, हर साल 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समानता की मांग को उजागर करने के लिए समर्पित है। इस दिन को मनाने की शुरुआत 1908 के बाद हुई, जब अमेरिका में मजदूर आंदोलन हुआ। इस आंदोलन में करीब 15 हजार महिलाएं न्यूयॉर्क की सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की मांग करने लगीं। महिलाओं की मांग थी कि उनकी नौकरी के घंटे यानी कामकाज की समय अवधि कम की जाए और वेतनमान में बढ़ोतरी हो। साथ ही इस आंदोलन में महिलाओं को मतदान का अधिकार देने की भी मांग की गई। 

क्यों मनाते हैं?

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समाज में समानता और अधिकार के साथ जीने का हक्क प्रदान करना है। भारत के कानून और संविधान में महिलाओं को पुरुषों के समान ही अधिकार मिले हैं। हालांकि बहुत सी भारतीय महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी न होने पर वह उत्पीड़न, असमानता और असुरक्षित जीवन जीती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिलाओं को दिए गए कानूनी अधिकारों के बारे में बताया जा रहा है, ताकि वह भी समाज में सम्मान और समान भाव के साथ रह सकें। 
 
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समानता का अधिकार - फोटो : Istock
भारत में महिलाओं के कानूनी अधिकार:

समानता का अधिकार

भारतीय संविधान महिलाओं को समानता और न्याय की सुरक्षा प्रदान करता है। धारा 14(1) ने सभी नागरिकों को समानता के अधिकार प्रदान किए हैं। भारतीय संविधान की धारा 14(1) के मुताबिक, भारत के सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संदर्भों में समानता का हक है। विभिन्न विचारों, धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान या किसी अन्य आधार पर भेदभाव के खिलाफ हर व्यक्ति को यह अधिकार मिला है।
 
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office colleagues - फोटो : istock
धारा 15(3)

समर्थन का अधिकार: इस धारा के तहत, सरकार विशेष प्रवर्तनों के माध्यम से विभिन्न वर्गों की महिलाओं को समर्थन प्रदान कर सकती है ताकि वे समाज में बराबरी के साथ रह सकें।

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समान वेतन का अधिकार - फोटो : Istock
समान वेतन का अधिकार

महिला और पुरुषों में समानता की बात होने के बावजूद मजदूरी से लेकर प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी तक में समान कार्य के लिए पुरुषों और महिलाओं के वेतन में अंतर पाया जाता है। कई क्षेत्रों में आज भी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम मेहनताना मिलता है। संविधान महिलाओं को समान पारिश्रमिक का अधिकार देता है। समान पारिश्रमिक अधिनियम के तहत, वेतन या मजदूरी में लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता।
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गोपनीयता - फोटो : अमर उजाला
पहचान गोपनीयता का अधिकार

महिलाओं के प्रति अपराध को लेकर कानून में महिलाओं को कुछ विशेषाधिकार मिले हैं। यौन शोषण मामले में पीड़िता को अपना नाम और पहचान गोपनीय रखने का अधिकार है। इसके साथ ही वह किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। पुलिस, मीडिया और अधिकारी को महिला की पहचान जाहिर करने का अधिकार नहीं है।
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प्रेग्नेंसी - फोटो : istock
मातृत्व लाभ अधिकार

नौकरीपेशा महिलाओं को कानून मातृत्व संबंधी लाभ व सुविधा का अधिकार देता है। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत, प्रसव के बाद महिला 6 महीने की छुट्टी ले सकती हैं और इस दौरान उनके वेतन में कोई कटौती नहीं होगी। प्रसव के बाद 6 महीने का मातृत्व अवकाश पूरा करके महिला वापस काम पर लौट सकती है। 
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