दीपक कुमावत बने पायलट।
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पायलट दीपक ने सफल किया मां का संघर्ष
टोंक जिले के रहने वाले दीपक कुमावत ने अपने पायलट बनने का सपना पूरा कर लिया है। हांलाकि, ये सिर्फ दीपक का सपना नहीं था, उनके माता-पिता और बहन भी यही चाहती थी। एलाइंस एयर एविएशन लिमिटेड में को- पायलट के रूप में चयन होने के बाद दीपक ने उन सबके सपने को भी साकार कर के दिखा दिया है। लेकिन, इसके पीछे की कहानी, संघर्ष, कड़ी मेहनत और संकल्प से भरी हुई है।
दरअसल, टोंक जिले के घोसी मोहल्ले के रहने वाले दीपक कुमावत बचपन से ही पायलट बनना चाहते थे। उनके पिता सत्यनारायण कुमावत मोटर वाइंडिंग का काम किया करते थे। जिससे उनका घर खर्च चलता था। 2011 में हुए एक सड़क हादसे में दीपक के पिता की अचानक मौत हो गई। जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
दीपक को अपना सपना बिखरता हुआ दिखा, लेकिन उनकी मां अनुराधा और दादा मोहनलाल कुमावत ने दीपक को संभाला। दोनों ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दीपक को कानपुर में कमर्शियल पायलट बनने के लिए प्रशिक्षण के लिए भेज दिया। इसके खर्च को उठाने के लिए दीपक की मां अनुराधा सिलाई का काम करने लगीं।
पिता की मौत से बिखरा दीपक का परिवार एक बार फिर संभलने लगा था, इसी बीच 2019 में उनके दादा मोहनलाल का निधन हो गया। एक बार फिर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया, लेकिन दीपक की मां और बहनों ने हिम्मत नहीं हारी।
दीपक को एक महीने के प्रशिक्षण के लिए स्पेन जाना था। इसके लिए उसकी मां अनुराधा, बहने आरती, अर्पिता और पायल ने कर्ज लेकर रुपये की व्यवस्था की और उसे प्रशिक्षण के लिये स्पेन भेज दिया। वहां से वापस आने के बाद दीपक वैकेंसी के इंतजार कर रहे थे। इसी बीच दुनिया में कोरोना ने दस्तक दे दी। ऐसे में उसे दो साल नौकरी के लिए इंतजार करना पड़ा, लेकिन अब वह को-पायलट बन गया है।