जयपुर के बाजार में उपलब्ध
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पतंगबाजी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है, बढ़िया क्वालिटी का मांझा, जिसको बरेली और कानपुर से मंगवाया जाता है। यह भी राजाओं के समय से वहीं से आता रहा है। फरमान अहमद के अनुसार, मांझा कॉटन का बना होता है, जिस पर चावल का माठ चढ़ाया जाता है, अहमद बताते हैं कि एक गट्टा मांझा बनाने में चार से पांच कारीगरों को एक पूरा दिन लग जाता है। मांझा बनाने वालों के हाथ छील जाते हैं, इसको बनाते हुए। एक गट्टा मांझा 600 रुपये से 1000 रुपये तक मिलता है।