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Mahashivratri: 25 फरवरी से शुरू होगा शिवाड़ का 5 दिवसीय मेला, रंग रोगन और डेकोरेशन से दमक रहा घुश्मेश्वर मंदिर

Mon, 24 Feb 2025 06:25 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर

सार

घुश्मेश्वर महादेव द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर शिवाड़ में 25 फरवरी से पांच दिवसीय महाशिवरात्रि मेले का शुभारंभ होगा। मंदिर ट्रस्ट ने मेले के दौरान पांच दिन तक होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली है।
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घुश्मेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
देश के बाहरवें ज्योतिर्लिंग के रूप में शुमार सवाई माधोपुर जिले के शिवाड़ कस्बे में कल से महाशिवरात्रि का पांच दिवसीय लक्खी मेला शुरू होगा। इसको लेकर मंदिर ट्रस्ट द्वारा बड़े पैमाने पर तैयारी को अंजाम दिया गया है। रंग रोगन और लाइट डेकोरेशन से घुश्मेश्वर मंदिर एवं देवगिरी पर्वत दमकने लगा है। मंगलवार प्रदोष और ध्वजारोहण दीप प्रज्वलन के साथ पांच दिवसीय मेले का आगाज शुरू होगा।
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पर्वत - फोटो : अमर उजाला
सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर शिवाड़ स्थित घुश्मेश्वर महादेव को देश के 12वें ज्योतिर्लिंग के रूप में माना जाता है। वर्ष भर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और घुश्मेश्वर मंदिर में अपनी हाजिरी लगाकर अपनी मनौती मांगते हैं।
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घुश्मेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
शिवाड़ स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर जन-जन के लिए आस्था का केंद्र है। वर्ष भर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। शिवाड़ कस्बे में घुश्मेश्वर महादेव मंदिर पर 25 फरवरी से लेकर 29 फरवरी तक पांच दिवसीय मेले का आयोजन होगा। जहां विभिन्न धार्मिक आयोजन भी उत्साह पूर्वक किए जा सकेंगे। 

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श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
घुश्मेश्वर मंदिर का इतिहास भी बेहद अद्भुत है। घुश्मेश्वर मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो कहा जाता है कि देवगिरी पर्वत के पास सुधर्मा नामक ब्राह्मण रहा करते थे। उनकी पत्नी थी सुधर्मा। लेकिन संतान सुख से वंचित रहने के कारण उन्हें लोगों के व्यंग्य बाण सुनने पड़ते थे। इससे व्यथित होकर सुधर्मा ने अपनी छोटी बहन सुषमा का विवाह करवाया। 
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श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
सुषमा भगवान शंकर की अनन्य भक्त थी। कुछ समय पश्चात घोषणा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। लेकिन सुधर्मा को लगा कि पुत्र मोह के कारण  उस का बहन के प्रति प्रेम कम होता जा रहा है, तब सुधर्मा ने पुत्र की हत्या कर शव सरोवर में फेंक दिया। रक्त रंजित सैया को देखकर जब पुत्र वधू ने सास को बताया तो शिव की तपस्या की और आकाशवाणी से पता लगा कि वह उस ने ही हत्या की है।
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घुश्मेश्वर मंदिर में भक्त - फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव ने सुधर्मा को खत्म करने की बात की तो सुषमा ने कहा कि नहीं प्रभु आप केवल उसकी बुद्धि सही कर दें। इस पर भगवान प्रसन्न हुए और कहा कि आज से मैं तुम्हारे नाम से इसी स्थान पर बात करूंगा और लोगों की सेवा करूंगा।
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घुश्मेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
घुश्मेश्वर मंदिर का इतिहास अपने आप में बेहद अद्भुत है। यह मंदिर तकरीबन 900 वर्ष पुराना बताया जाता है। यहां मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्व प्राकट्य हैं। बताया जाता है कि घुश्मा की तपस्या से शिव का प्राकट्य होना हुआ था। इस शिवलिंग को पाताल से जुड़ा हुआ माना जाता है। वेदों और उपनिषदों में भी शिवाड घुश्मेश्वर का बखान वर्णित है।

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घुश्मेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
बताया जाता है कि आदिकाल से मंदिर का इतिहास है। महर्षि वेदव्यास ने भी उपनिषद में इस मंदिर का वर्णन किया है। इस मंदिर में देवगिरी पर्वत भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। पहाड़ पर स्थित देवी मंदिर को मंदिर ट्रस्ट ने विकसित कर विशेष आकर्षण का केंद्र बनाया है। विभिन्न देवी-देवताओं की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं देव गिरी पर्वत पर स्थापित की है।
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पर्वत - फोटो : अमर उजाला
मंदिर के प्रति लोगों की विशेष आस्था जुड़ी हुई है। सालभर मंदिर पर विभिन्न आयोजन होते हैं। लेकिन मेले के दौरान विशेष रूप से मंदिर ट्रस्ट द्वारा धार्मिक आयोजन पांच दिवस तक होंगे। महाशिवरात्रि मेले का शुभारंभ शोभायात्रा और झंडे की रस्म के साथ शुरू होगा। घुश्मेश्वर महादेव मंदिर के बारे में लोगों का मानना है कि जिस किसी ने सच्चे मन से भगवान शिव के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई, फिर उसकी झोली मुरादों से कभी खाली नहीं रही।
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