श्रद्धालु
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सुषमा भगवान शंकर की अनन्य भक्त थी। कुछ समय पश्चात घोषणा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। लेकिन सुधर्मा को लगा कि पुत्र मोह के कारण उस का बहन के प्रति प्रेम कम होता जा रहा है, तब सुधर्मा ने पुत्र की हत्या कर शव सरोवर में फेंक दिया। रक्त रंजित सैया को देखकर जब पुत्र वधू ने सास को बताया तो शिव की तपस्या की और आकाशवाणी से पता लगा कि वह उस ने ही हत्या की है।