दिनभर आसपास में उड़ती रहीं पतंगें।
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जयपुर शहर में छतों पर पतंगबाजी, म्यूजिक और खाना हुआ
जयपुर शहर में इस बार पतंगबाजी रवियोग, द्विपुष्कर योग सहित अन्य योग संयोगों में हुई। दिनभर चरखियां घूमती रहीं और आड़ी-तिरछी डोर से आसमान में पेंच लड़ते रहे। छतों पर ही नाश्ता और खाना भी लोग खाते नज़र आए। तिल के लड्डू, फीणी, रेवड़ियां, गजक, दाल की पकौड़ियां और अलग अलग पकवान घर के सदस्यों के साथ मेहमानों को परोसे गए। सरकार की गाइडलाइंस की आंशिक पालना हुई। सुबह 6 से 8 बजे तक पतंगबाजी नहीं हुई। लेकिन शाम 5 से 7 बजे तक के बीच जमकर पतंगें उड़ीं। जबकि गृह विभाग ने इस पर रोक लगाई थी। हालांकि, इस बार प्लास्टिक, सिथेंटिक, लोहा और मेटल के मांझे से पतंगबाजी नहीं की गई।