नारायण जोशी और मोहम्मद मंजूर कुरैशी।
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'डर किस बात का, सायरन बजता है तो लाइटें बंद कर देते हैं'
बाड़मेर के करतारपुरा में रहने वाले बुजुर्ग नारायण जोशी जब नौ साल के थे, तब उन्होंने युद्ध देखा था। उसे याद करते हुए वे कहते हैं, डर किस बात का, मैंने तो बचपन में ही युद्ध देख लिया था। उस समय रात में पाकिस्तान के जहाज आते थे। हमारे जहाज सुबह जाकर पाकिस्तान के जहाजों को फोड़ देते थे। तब और अब में बहुत फर्क आ गया है। भारत सर्वगुण संपन्न हो गया है। अब तो तनाव की कोई बात ही नहीं है। रात में सायरन बजता है तो सभी लाइटें बंद कर देते हैं। सब मिल-जुलकर रह रहे हैं।
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'सरकार इजाजत दे तो युद्ध लड़ने को तैयार'
दरअसल, जब आसमान में चिंगारियां उठ रही होती हैं तो जोश अलग हो जाता है। ऐसा ही माहौल यहां है, जो लोगों का उत्साह बढ़ा रहा है। सायरन या ब्लैकआउट से लोग डर नहीं रहे हैं बल्कि सतर्क हो रहे हैं। वे देश के लिए मर मिटने को तैयार हैं। इसका अंदाजा मोहम्मद मंजूर कुरैशी से बात करके लगाया जा सकता है। वे कहते हैं- अब हमारी उम्र 70 की हो रही है। लेकिन, अगर सरकार इजाजत देती है तो सीमा पर जाकर युद्ध करने के लिए तैयार हूं। पाकिस्तान की नापाक हरकतों को हर हाल में जवाब दिया जाना चाहिए।