चौहान वंश की कुलदेवी
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बताया जाता हैं कि यहां सम्राट पृथ्वीराज चौहान आते थे और विशेष तौर से युद्ध में जाने से पहले माता का आशीर्वाद लेने के लिए और पूजा-अर्चना करते थे। पृथ्वीराज चौहान से भी पहले का यह मंदिर है जो मंदिर के ऊपर लिखे शिलालेख बताते हैं। मंदिर में एक ऐसा माता गंगा का कुंड है जिसमें पानी कभी समाप्त नहीं होता जितना उसमें से पानी निकालो आ जाता है। मंदिर में महादेव का स्थान भी है। कहा जाता है यहां पर सिर्फ माता का मुख ही बाहर की तरफ है बाकी शरीर धरती माता के अंदर है। यहां बहुत ही धूमधाम से आरती की जाती है नवरात्रा में विशेष तौर से मेला लगता है। कहा जाता है कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान माता के अनन्य भक्त थे, यही वह स्थान है जहां माता ने उन्हें दर्शन दिये थे। आज भी माना जाता है कि चामुंडा माता मंदिर में आने वाले हर भक्त के दुख दर्द को हर लेती है और मनवांछित फल प्रदान करती है।
कुंड का पानी नहीं होता खत्म
मंदिर प्रांगण में गंगा मैया, भगवान भोलेनाथ, हनुमान जी और भैरव बाबा का भी मन्दिर है । गंगा मैया के मंदिर में जल का एक छोटा सा कुंड है, जिसका पानी कभी भी समाप्त नहीं होता, इस कुंड के जल को गंगा के समान पवित्र माना जाता है। आज शारदीय नवरात्रि के पहले दिन चामुंडा माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और नवरात्रि में माता रानी का विशेष श्रृंगार कर उनकी पूजा-अर्चना की गई, आने वाले दिनों में मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा।
अजमेर से विकास टाक की रिपोर्ट