हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष का विशेष महत्व है। 15 दिवसीय श्राद्ध पक्ष में लोग अपने पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और अनुष्ठान करते हैं। यूं तो देश के कई तीर्थ स्थलों पर पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध किए जाते हैं लेकिन अजमेर के तीर्थ गुरु पुष्कर में श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। यही वजह है कि आज भी हजारों की संख्या में लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने के लिए तीर्थ नगरी पुष्कर में आते हैं। आखिर क्या है पुष्कर में श्राद्ध, पिंडदान व तर्पण का महत्व जानिए इस खबर में...
राजस्थान के अजमेर जिले में पुष्कर एक ऐसा तीर्थक्षेत्र है, जहां पर 7 कुलों और पांच पीढ़ियों तक के पूर्वजों की शांति के लिए श्राद्ध किए जाते हैं। इस बार 18 सितंबर से शुरू हुआ श्राद्ध पक्ष आज 2 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त हो रहा है। पुष्कर सरोवर के पुरोहित पंडित दिनेश पाराशर बताते हैं कि पुष्कर के पवित्र सरोवर के घाट पर अपने पूर्वजों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध कर्म से पूर्वजों को शांति मिलती है और पितृ दोष एवं अन्य व्याधियों से भी मुक्ति मिलती है। पितरों के आशीर्वाद से घर में खुशहाली आती है।