पंजाबी गायक सरदूल सिकंदर को उनके पैतृक गांव खेड़ी नौध सिंह में देर शाम सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इससे पहले खन्ना के गांव बुलेपुर में सरदूल के निवास से उनकी अंतिम यात्रा सुबह 11 बजे रवाना की गई। करीब 20 किमी का सफर तय करते हुए अंतिम यात्रा छह घंटे में गांव खेड़ी पहुंची। करीब रात आठ बजे उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। सरदूल की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में पंजाबी संगीत जगत के कलाकार शामिल हुए और नम आंखों से आखिरी विदाई दी। अंतिम यात्रा में सरदूल सिकंदर के अब तक गाए प्रसिद्ध गीतों को बजाया गया और शहर के हर गली मोड़ चौराहे पर फूल बरसाए गए। उधर, गांव खेड़ी नौध सिंह में सरदूल के घर के बाहर लोगों की भारी भीड़ रही। हर कलाकार ने उनके बारे में भरे गले से कहा कि सरदूल बहुत कम आयु में बड़ा नाम कमाकर चले गए। उनकी आवाज हमेशा जिंदा रहेगी।