ट्रांसजेंडरों को एक और जीत हासिल हुई है। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु यूनिफॉर्म्ड सर्विस रिक्रूटमेंट बोर्ड को आदेश दिया है कि वह ट्रांसजेंडर के पृथिका याशिनी को सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त करे। (सभी तस्वीरें पृथिका के फेसबुक प्रोफाइल से साभार)
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बोर्ड ने याशिनी के आवेदन को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल और जस्टिस पुष्पा सत्यनारायण की पीठ ने बोर्ड को अगली भर्ती प्रक्रिया तक ट्रांसजेंडरों को तीसरी श्रेणी में शामिल करने का भी आदेश दिया है।
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बोर्ड ने याशिनी का आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया था कि पुलिस भर्ती बोर्ड के पास तीसरे लिंग के लिए कोई कैटेगरी नहीं थी।
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बोर्ड ने इस बात का भी हवाला दिया कि ट्रांसजेंडरों की परीक्षा, जिसमें लिखित, शारीरिक और साक्षात्कार तीनों शामिल हैं, उनमें किसी तरह का आरक्षण या छूट नहीं दी जाती है।
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लेकिन पृथिका ने हार की राह नहीं थामी और उसने कई याचिकाएं दायर की। इन याचिकाओं की बदौलत ही परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए रखी गईअंकों की कुल सीमा को 28.5 से घटाकर 25 कर दिया गया।
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याशिनी ने सभी शारीरिक परीक्षाएं पास कर ली थी लेकिन वो दौड़ में एक सेकेण्ड पीछे हो गई लेकिन वह मान लिया गया।
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याशिनी एक आईपीएस ऑफिसर बनना चाहती है और इस फैसले पर कहती है कि 'मैं बहुत उत्साहित हूं यह पूरे ट्रांसजेंडर समाज के लिए एक नई शुरुआत है।'
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अदालत में याशिनी का मामला देख रहीं उनकी वकील भवानी बताती हैं कि यह आदेश कई अन्य ट्रांसजेंडरों के लिए नए रास्ते खोलेगा जो अभी नौकरी पाने की कोशिश में कोर्ट कचेहरी के चक्कर लगा रहे हैं।