लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। इनमें श्रीराम अरुण की अलग पहचान थी। दो बार पुलिस महानिदेशक रहे श्रीराम अरुण को कड़क, अनुशासन पसंद और महकमे में नई व्यवस्था देने वाले अफसर के रूप में याद किया जाता है।
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डेमो
1963 बैच के आईपीएस श्रीराम अरुण वर्ष 1999 में दोबारा पुलिस महानिदेशक बने तो थानों पर लंबित विवेचनाओं के निस्तारण का अभियान शुरू कराया। निरीक्षक व उपनिरीक्षकों ने कानून व्यवस्था ड्यूटी में व्यस्तता के चलते तफ्तीश का मौका न मिलने की बात कही। अनुशासन पसंद श्रीराम अरुण ने पुलिसकर्मियों का मर्म समझा और थानों पर विवेचना सेल के गठन के आदेश दिए।
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UP Police
नए बैच के तेजतर्रार उपनिरीक्षकों को कानून व्यवस्था और अनुभवी निरीक्षक व उपनिरीक्षकों की विवेचना सेल में तैनाती कराकर तफ्तीशों का निस्तारण कराया। न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल होने का ग्राफ बढ़ा, वहीं झूठे मामले जल्द खत्म होने से फर्जी नामजद लोगों को राहत मिली। विवेचना सेल थानों की अहम इकाई बनती गई।
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- फोटो : डेमो
पुलिसकर्मियों के बच्चों की भी चिंता
अनुशासन के प्रति सख्त श्रीराम अरुण को सिपाहियों तक के परिवार की चिंता रहती थी। पुलिसकर्मियों के बच्चों के बिगड़ने के मामले सामने आने पर उन्होंने विभिन्न जिलों में पुलिस मॉडर्न स्कूल की स्थापना कराई। मातहतों के बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ पुलिसकर्मियों के बेहतर इलाज के लिए जीवनरक्षक निधि की व्यवस्था कराई।
पुलिस में कोर्ट मॉर्शल जैसी व्यवस्था की वकालत
प्रदेश में दोबारा पुलिस महानिदेशक बनने पर श्रीराम अरुण ने पुलिसकर्मियों की अपराध में संलिप्तता और अपराधियों से साठगांठ उजागर होने पर पुलिस में कोर्ट मॉर्शल जैसी व्यवस्था की जरूरत बताई थी। इस पर काफी हड़कंप मचा, जबकि वह पुलिस में भी सेना जैसा अनुशासन चाहते थे।