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रील नहीं, रियल लाइफ के सीरियल किलर्स, दरिंदगी जानकर कांप जाएंगे

Sat, 26 Mar 2016 01:04 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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हत्या करना इनका शौक - फोटो : telegraph.co.uk
ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में पुलिस ने सैलसन जोस दास ग्राकास 42 लोगों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। ग्राकास ने पुलिस कस्टडी में बताया कि उसे गोरी चमड़ी वाली महिलाओं को मारने में मजा आता है। उसने बताया वो सुपारी लेकर हत्याएं करता रहा है। 42 लोगों में 39 महिलाओं को मौत के घाट उतारा गया था।
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हत्या करना इनका शौक - फोटो : telegraph.co.uk
ब्राजील के ही पेड्रो रोड्रीगेज फिल्हो पर 100 लोगों के मारने का आरोप लगा जिनमें 71 हत्याओं की बात सच निकली। ब्राजील के जेल में जहां सबसे ज्यादा कैद की सजा 30 साल की होती है वहीं इस किलर के अपराध को देखते हुए इसे 128 साल कैद की सजा सुनाई गई। फिल्हों जब 14 साल का था तब पहली दफा हत्या की थी। बाद में इसने अपने पिता को भी मौत के घाट उतार दिया और उनके दिल का एक टुकड़ा भी खा गया।
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हत्या करना इनका शौक - फोटो : telegraph.co.uk
रूस के अलेक्जेंडर पिचुशकिन को चेसबोर्ड किलर के नाम से जाना जाता है। पिचुशकिन के बारे में कहा जाता है कि इसका इरादा 64 लोगों की हत्या करने का था। लेकिन माना जाता है कि साल 1992 से 2006 के दौरान इसने 48 लोगों को मौत के घाट उतारा। पिचुशकिन बेसहारा लोगों को पहले वोडका पिलाता था फिर हथोड़े से उनके सिर पर वार कर मार देता था। अदालत में पिचुशकिन ने बताया कि हत्या करने में इसे पहले प्यार जैसा अहसास होता है, जो कभी भुलाए नहीं भूलता। फिलहाल ये उम्रकैद की सजा काट रहा है। 

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हत्या करना इनका शौक - फोटो : telegraph.co.uk
साल 1978 से 1990 के दौरान 52 महिलाओं और बच्चों को हवस का शिकार बनाकर उनकी हत्याएं करना इस शख्स का शौक था। नाम है आंद्रेई चिकातिलो। इसे बुचर ऑफ रोस्तो के नाम से भी जाना जाता है। साल 1992 में इसे मौत की सजा हुई और साल 1994 में गोलियों से भूनकर सजा दी गई।
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हत्या करना इनका शौक - फोटो : telegraph.co.uk
एनातोली ओनोप्रिएंको को साल 1989 से लेकर 1996 के बीच 52 लोगों को जान से मारने के जुर्म में साल 1996 में गिरफ्तार किया गया। इसकी दरिंदगी का अंदाजा इसी लगाया जा सकता है कि इसे बीस्ट ऑफ यूक्रेन का नाम भी दिया गया। इसे उम्रकैद हुई लेकिन साल 2013 में दिल का दौरा पड़ने से जेल में ही इसकी मौत हो गई।

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