डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को साध्वी रेप केस में 20 साल की सजा रोहतक जेल में काट रहे हैं। जानिए, ऐसे कौन से कारण थे कि डेरा मुख्यालय की तलाशी लेने की जरूरत समझी गई...
बता दें कि गुरमीत राम रहीम की गिरफ्तारी के बाद से ही लगातार डेरे की जांच का दबाव बढ़ता जा रहा था। इस दबाव के बीच ही हरियाणा सरकार ने यह काम खुद करने के स्थान पर हाईकोर्ट के आदेशों के अधीन करना चाहती है।
डेरे को लेकर कई किस्से, कहानियां चर्चा में हैं। इसमें गुफा से लेकर डेरे में हथियार होने की बात कही जाती है। हरियाणा सरकार को हाईकोर्ट से जांच की अनुमति मिल गई है तो ऐसे में अब डेरे से जुडे़ हर राज से पर्दा उठ जाएगा।
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गौरतलब है कि यौन शोषण की शिकार हुई पूर्व साध्वियां अपने बयान में ये बात कह चुकी है कि जिस जो डेरा प्रमुख को जो साध्वी पसंद आती थी, उसे वो अपनी गुफा में बुला लिया करता। जो साध्वियां आनकानी करती उन्हें इसकी सजा दी जाती। अभी तक राम रहीम की गुफा के बारे में ऐसी ही काल्पनिक बातें ही हो रही हैं। इसका मेन कारण यह है कि डेरा प्रमुख की चार एकड़ में फैली गुफा में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी।
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गुरमीत राम रहीम को सजा के बाद पुलिस ने पिछले दिनों 133 नामचर्चा घरों को खंगाला था और वहां से काफी संख्या में डंडे, हॉकी, बेसबॉल स्टिक, पेट्रोल बम का सामान, पेट्रोल की कैन इत्यादि संदिग्ध सामान मिला था। इसलिए पुलिस अफसरों को इन नामचर्चा घरों पर खास ध्यान रखने को कहा गया है। उसके बाद ही सिरसा डेरे की गतिविधियां भी संदेह के घेरे में आ गई थीं। माना जा रहा है कि डेरा मुख्यालय से आपत्तिजनक सामान मिलेगा।
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सिरसा में सच्चा सौदा के दो डेरे हैं। छोटा डेरा शहर के बेगू रोड पर स्थित है। यह डेरा मस्ताना जी के जमाने का है और करीब सौ एकड़ में फैला है। मेन डेरा गांव बेगू से तीन किलो मीटर दूर सदर थाना क्षेत्र में हैं। यह 700 एकड़ में फैला है।
डेरे के पूर्व समर्थकों ने मीडिया में यह आरोप लगाए हैं कि डेरे में नाफरमानी करने वाले लोगों को वहीं मार कर दफन कर दिया जाता था। ऑपरेशन के तहत डेरे में सबसे पहले उन नरकंकालों के लिए सर्च आपरेशन चलाएगी।
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सरकार की ओर से रविंदर ढुल्ल ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि सिरसा के डेरा मुख्यालय में न सिर्फ रिहाइशी कॉलोनी ही है बल्कि कई व्यावसयिक संस्थान भी हैं। डेरा मुख्यालय की जांच में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और सरकार की इस प्रक्रिया पर कोई भी सवाल न उठे, इसके लिए सरकार यह जांच किसी निष्पक्ष न्यायिक अधिकारी की निगरानी में करवाना चाहती है। बैंच ने सुनवाई में रिटायर्ड सेशन जज एकेएस पवार को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया।
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हाईकोर्ट ने पवार को विशेष अधिकार देते हुए स्पष्ट किया कि यदि उन्हें किसी भी विषय के विशेषज्ञ जैसे फॉरेंसिक साइंस व अन्य की जरूरत होगी तो वह उन्हें उपलब्ध करवाया जाएगा। डेरा सच्चा सौदा का चप्पा-चप्पा खंगाला जाएगा। डेरा के अंदर सैकड़ों हॉल और कमरे हैं। डेरा प्रबंधन इनके ताले खोल दे तो ठीक नहीं तो ये काम लुहारों से करवाया जाएगा। इसके लिए करीब 15 लुहारों से प्रशासन ने संपर्क कर रखा है।
इसके साथ ही डेरे से जुड़ी मिलिट्री इंटेलिजेंस की रिपोर्ट कितनी सार्थक है, इसका भी खुलासा हो जाएगा। मिलिट्री इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट कोर्ट के सामने एक अन्य केस की सुनवाई के दौरान रखी गई थी। उस रिपोर्ट के अनुसार डेरे में लोगों को मिलिट्री ट्रेनिंग और वहां बड़ी संख्या में हथियार होने की आशंका जताई गई थी। ये सारा सर्च ऑपरेशन ‘तीसरी आंख’ की निगरानी में रहेगा। इसके लिए 50 कैमरे हायर किए गए हैं।