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Raja-Sonam: सोनम-राजा के जिंदा लौटने के लिए उज्जैन में हुई थी तंत्रक्रिया, गोबर में लपेट कर रखे थे कपड़े-मंत्र

Thu, 12 Jun 2025 05:27 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

राजा रघुवंशी हत्याकांड में उज्जैन में तंत्र क्रिया किए जाने का खुलासा हुआ है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रामेश्वर दास ने बताया कि राजा और सोनम के कपड़े और फोटो से अनुष्ठान हुआ था। क्रिया के पांच दिन बाद राजा का शव मिला और फिर सोनम का भी पता चला।
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सोनम और राजा के लिए उज्जैन में की गई तंत्र क्रिया। - फोटो : अमर उजाला
इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में रोज परत-दर-परत सच्चाई सामने आती जा रही है। सोनम और राजा के 23 मई से लापता होने के बाद उनके जिंदा लौटने की मंशा से उज्जैन में तंत्र क्रिया हुई थी। हालांकि, इसके पांच दिनों बाद राजा रघुवंशी का शव मिला और सोनम का भी पता चल गया, लेकिन उसकी वापसी हत्या की आरोपी के रूप में हुई।  

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उज्जैन तंत्र, मंत्र और आस्था के लिए काफी प्रसिद्ध है, लेकिन इन दिनों यह शहर इसलिए चर्चा का विषय बना हुआ है कि इंदौर में हुए बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड की तंत्र क्रिया अनुष्ठान भी उज्जैन में होने की बात सामने आई है। उज्जैन के स्थानीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रामेश्वर दास महाराज ने यह दावा किया है कि 28 मई को उनके पास राजा और सोनम के परिवार का एक युवक अभिषेक आया था, जिसने बताया था कि उसके भाई और भाभी अचानक कहीं गायब हो गए हैं, जिनका कोई पता नहीं लगता रहा है। राजा और सोनम दोनों की सकुशल वापसी के लिए तंत्र क्रिया करने के पहले महंत रामेश्वर दास ने राजा सोनम के फोटो और कपड़े मंगवाए थे। इसके बाद यह अनुष्ठान शुरू हुआ। तंत्र अनुष्ठान के दौरान राजा के कपड़ों को पर्ची पर लिखकर मंत्रों के साथ गोबर में लपेटकर रखा और इस अभिमंत्रित यंत्र पर 50 किलो वजन रखा था। विशेष बात यह थी कि प्रतिदिन सुबह शाम इन मंत्रों का जाप किया जाता था और बीज मंत्रों से अनुष्ठान भी होता था। 

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सोनम और राजा के लिए उज्जैन में की गई तंत्र क्रिया। - फोटो : अमर उजाला
मंत्रों में बड़ी शक्ति होती है, यही कारण है कि 28 मई को शुरू किए गए इस अनुष्ठान के बाद पांचवें दिन राजा की लाश मिल गई थी और फिर बाद में सोनम का भी पता चल गया। महंत रामेश्वर दास ने बताया कि हम कभी भी कोई क्रिया अधूरी नहीं छोड़ते हैं, इसीलिए हमने राजा और सोनम के परिवार के लोगों को बुलाकर तंत्र क्रिया में प्रयोग किए गए राजा और सोनम के कपड़ों के साथ ही उनके फोटो और मंत्रों के यंत्र को शिप्रा नदी में प्रवाहित कर दिया।
 
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