बेटी की सफलता पर परिवार खुश।
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पिता का सपना, बेटी की प्रेरणा बनी
नव्या बताती हैं कि उनके पिता नवलेश तिवारी भी एक समय एनडीए में जाना चाहते थे, लेकिन किसी कारणवश उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। जब नव्या आठवीं कक्षा में थीं, तब उन्होंने यह सपना अपने लिए चुन लिया। जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने एनडीए में लड़कियों को प्रवेश की अनुमति दी, नव्या ने पिता के अधूरे सपने को अपना मिशन बना लिया था और अब कामयाबी हासिल की।