श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी उमा सांझी महोत्सव 2024 के आयोजन के तहत चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जो की दो वर्गों में आयोजित की गई।
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उमा सांझी महोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
इसमें कनिष्ठ वर्ग (कक्षा एक से सात) में प्रथम पुरस्कार आदित्यनारायन नायक, द्वितीय पुरस्कार वेदांत शोभाकार व तृतीय पुरस्कार कुमारी चाहत गोयल ने प्राप्त किया।
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उमा सांझी महोत्सव
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इसी प्रकार वरिष्ठ वर्ग में (कक्षा आठ से 12) में प्रथम पुरस्कार कुमारी एकता सिंह, द्वितीय पुरस्कार कुमारी स्तुति पांडे व तृतीय पुरस्कार कुमारी मनस्वी शोभाकार ने प्राप्त किया।
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उमा सांझी महोत्सव
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श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी भारत शर्मा ने निर्णायक के रूप में उपस्तिथ थे। सायं को ग्वालियर से पधारे श्री समर्थ बालकृष्ण धोलीबुवा जी द्वारा नारदीय कीर्तन हुआ।
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उमा सांझी महोत्सव
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सभा मंडप में प्राचीन शिला पर रंग महल की रंगोली बनायी गई, जिसको सत्यनारायण जोशी, मुकेश शर्मा, भूषण व्यास, सुभाष शर्मा, संदीप शर्मा, नवनीत शर्मा, रूपम शर्मा, गोपाल शर्मा, अक्षय शर्मा, अनंतनारायण शर्मा आदि द्वारा रंगोली का निर्माण किया गया।
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उमा सांझी महोत्सव
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साथ में कोटितीर्थ कुंड में नौका विहार की झाकी में श्री जटाशंकर, सभामंडप में सिहासन में श्री उमा महेश, श्री होलकर मुखोटा आदि की झांकी सजायी गई।
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उमा सांझी महोत्सव
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श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी उमा सांझी महोत्सव 2024 के दौरान सांस्कृतिक कार्यकर्म का आयोजन किया जाता है, जिसमें प्रतिदिन सायं श्री महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासनिक कार्यालय के सामने फेसिलिटी की छत पर लोक संगीत व लोक नृत्य पर आधारित सांस्कृतिक कार्यकर्मों का आयोजन किया जा रहा है।
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महोत्सव
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इसी क्रम में प्रथम प्रस्तुति में मालवी लोकगीत भजन मंडल ग्राम झोंकर जिला शाजापुर के द्वारा मालवी लोक शैली में लोक गीत भजन की प्रस्तुति दी गई, जिसमें गणेश वंदना पालणा में झुला झुले गजानंद के बाद, संझा गीत की प्रस्तुति दी गई। उसके बाद शिव भजन भोले बाबा ने डमरू बजाया पर्वत पर शोर मचाया।
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उमा सांझी महोत्सव
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पारंपरिक लोकगीत कुआं पाणी भरवा जंऊ रे नजर लग जाए, नजर लग जाय रे हवा लगी जाय। कबीर लोक भजन जरा धिरे धिरे गाड़ी हांको मेरे राम गाड़ी वाले के साथ प्रस्तुति का समापन किया गया। द्वितीय प्रस्तुति उज्जैन की ईशानी भट्ट के एकल नृत्य की हुई।
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उमा सांझी महोत्सव
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ईशानी द्वारा सर्वप्रथम गणेश वंदना सिन्दुर लाल चणायो की प्रस्तुति दी गई। उसके पश्चात शिव शक्ति की आराधना अर्धाग शिव पर्वती जी के अर्धनारेश्वर रूप का वर्णन नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करने के बाद कालिका माता की स्तुती चटके चुमडली व मालवी लोकनृत्य की प्रस्तुती दी। प्रस्तुति का समापन झोगवा (ललाटी भंडार) से किया।
उमा सांझी महोत्सव 2024 के द्वितीय दिवस की अंतिम प्रस्तुति नृत्यसिद्धा कथक अकादमी द्वारा रितु शुक्ला के निर्देशन में दी गई। उमा सांझी महोत्सव में महाकाल प्राकट्य कथा और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में भूतभावन महाकाल की ही भस्मारती क्यों प्रश्न को सजीवता से कथक शैली में बतौर फ्यूजन मंचित किया।