शाजापुर जिले के प्रसिद्ध आस्था केंद्र मंगलनाथ धाम में मंगलवार को बाबा मंगलनाथ की शाही सवारी धूमधाम से निकाली गई। गाजे-बाजे के साथ निकली सवारी में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। रथ पर सवार होकर बाबा मंगलनाथ ने शहरवासियों को दर्शन दिए। इस दौरान बाबा की शाही सवारी का जगह-जगह पूजन अर्चन भी किया गया।
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रथा पर सवार होकर निकले बाबा मंगलनाथ
- फोटो : अमर उजाला
सड़क के दोनों किनारों और घर की छतों पर खड़े होकर दर्शनार्थियों ने बाबा मंगलनाथ के दर्शन किए। बाबा की शाही सवारी की श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। सवारी के साथ ही झांकिया भी निकाली गई। मलखंभ के खिलाड़ियों ने मलखंभ की प्रस्तुति दी, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया। बैंड और ताशे के बीच उत्साह से शाही सवारी ने नगर भ्रमण किया। कलाकारों ने शिव भजनों की प्रस्तुति दी। इस दौरान ताशा और बैंड पार्टी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। जिले में मौसम साफ होने की वजह से भक्तों काफी उत्साहित नजर आए।
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धूमधाम से निकली बाबा मंगलनाथ की शाही सवारी
- फोटो : सोशल मीडिया
जिले के एबी रोड स्थित मां राजराजेश्वरी मंदिर के पीछे स्थित मंगलनाथ महादेव मंदिर में मंगलवार को विशेष चहल-पहल रही। शाम पांच बजे विशेष आरती के साथ बाबा की सवारी शुरू हुई। आरती में आला अधिकारियों के साथ ही जनप्रतिनिधि और शहरवासी मौजूद रहे। बाबा मंगलनाथ की सवारी को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। बड़ी संख्या में सुबह से ही भक्त बाबा मंगलनाथ के दर्शन करने मंदिर पहुंच रहे थे। सवारी से पूर्व बाबा मंगलनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया।
बीते दो साल कोरोना महामारी के चलते आयोजनों पर रोक थी, लिहाजा इस साल प्रतिबंध हटने के बाद सभी आयोजन धूमधाम से किए जा रहे हैं। लोगों ने पूरे ठाठ-बाट के साथ बाबा की शाही सवारी निकाली जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उमड़े।
बाबा मंगलनाथ की सवारी मंगलनाथ महादेव मंदिर से प्रारंभ होकर एबी रोड, बस स्टैंड, टेंशन चौराहा, मगरिया चौराहा, सोमवारिया बाजार, कंस चौराहा, आजाद चौक, छोटा चौक सहित अन्य क्षेत्रों में पहुंची। इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण भी किया गया। बाबा मंगलनाथ की सवारी में झांकिया भी शामिल रहीं। एक झांकी में दशासन रावण के दरबार में अंगद के पैर जमाने के प्रसंग का मंचन किया गया। वहीं एक अन्य झांकी में त्रिदेव आदि की झांकी का मंचन किया गया। झांकिया के साथ ही बैंड पर शिव भजन और राष्ट्रभक्ति गीतों ने भी समा बांधा।