पंडित प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम में हजारों लोगों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
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कर्म की गति का भोग भोगना ही होता है
पंडित मिश्रा ने कहा कि कर्म की गति का भोग हमें भोगना पड़ता है। मिठाई और दवाई में अंतर है, हम मिठाई अपनी मर्जी से सेवन करते हैं, लेकिन दवाई डॉक्टर की सलाह से लेते हैं। जन्म लेने के बाद इस शरीर को पाने के बाद दुनिया के सारे दुख, सारी तकलीफें, सारे कष्ट, सारे रोग, बीमारी और दुख हमारे जीवन में जो-जो लिखा होगा वो सब आएगा। लेकिन ऐसा नहीं है कि दुख ही दुख मिलेगा। शिव महापुराण की कथा कहती है जैसे दिन होता है रात होती है, धूप होती है छांव होती है, ठीक उसी तरह सुख होता है दुख होता है। उस सुख और दुख के बीच में अगर किसी ने भगवान का गुणगान कर लिया, उसने भगवान का भजन कर लिया तो उसकी जिंदगी सार्थक हो जाती है और उसका जीवन आनंदित हो जाता है।