अब एक बार फिर, बुंदेलखंड के सबसे बड़े शहर सागर में 27 सितंबर को "रीजनल इंडस्ट्रीयल कॉन्क्लेव" का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
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सागर में आयोजित रीजनल इंडस्ट्रीयल कॉन्क्लेव की तैयारियां
- फोटो : अमर उजाला
मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड अंचल औद्योगिक दृष्टि से भारत के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में से एक है। रोजगार के साधनों की कमी के कारण इस क्षेत्र के हजारों लोग रोज़गार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं। आजादी के बाद से इस क्षेत्र के विकास के वादे तो कई हुए, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आया। राजनीतिक दलों ने अंचल की सूरत बदलने की कसमें तो खाईं, मगर उन वादों का पूरा होना अभी भी बाकी है।
अब एक बार फिर, बुंदेलखंड के सबसे बड़े शहर सागर में 27 सितंबर को "रीजनल इंडस्ट्रीयल कॉन्क्लेव" का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। सरकार और प्रशासन ने इस आयोजन के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार के माध्यम से युवाओं और बेरोजगारों को यह उम्मीद दी जा रही है कि इस कॉन्क्लेव के बाद क्षेत्र में निवेश की बाढ़ आएगी और यहां की तस्वीर बदल जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसे एक गेम-चेंजर के रूप में देख रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि इस कॉन्क्लेव से बुंदेलखंड के औद्योगिक विकास में तेजी आएगी। मप्र सरकार बुन्देलखंड क्षेत्र के विकास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। हालांकि, इससे पहले भी कई प्रयास किए गए, लेकिन मध्यप्रदेश में निवेशकों की रूचि बड़े पैमाने पर आकर्षित नहीं हो सकी। बुंदेलखंड में खनिज, पर्यटन और कृषि-आधारित उद्योगों की संभावनाओं के बावजूद, निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
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सागर में आयोजित रीजनल इंडस्ट्रीयल कॉन्क्लेव की तैयारियां
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में निवेश की चुनौतियां
बता दें कि सागर संभाग में सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह और पन्ना जिले आते हैं। इनमें औद्योगिक विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिससे ऐसी उम्मीद है कि राज्य में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सागर जिले में कुल पांच औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 440 एकड़ जमीन पर 206 औद्योगिक इकाइयां वर्त्तमान में चल रही है। सरकारी आंकड़े के मुताबिक इन इकाइयों में लगभग 211 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है और 4789 लोगों को रोजगार मिल रहा है।
इसके अलावा प्रमुख परियोजनाओं में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) द्वारा बीना स्थित रिफाइनरी में 15000 करोड़ रुपये का निवेश और 4000 लोगों को रोजगार शामिल है। इसके साथ ही रिफाइनरी के विस्तार और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए 49000 करोड़ रुपये का निवेश हाल ही में प्रस्तावित है, जिसमें हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है
छतरपुर जिला औद्योगिक विकास की वर्तमान स्थिति
छतरपुर जिले में तीन औद्योगिक क्षेत्र हैं, जो 145 एकड़ जमीन पर स्थित हैं। यहां कुल 82 औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं, जिनसे 19 करोड़ रुपये का निवेश और 560 लोगों को रोजगार मिला है। जिसे कोई ज्यादा उपलब्धि भरा नहीं कहा जा सकता, लेकिन सरकार की मानें तो यहां भविष्य में ग्राम ढढारी में 131 एकड़ जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग द्वारा दामची, नया गांव, पठापुर, और सिकारपुरा में भी नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास प्रस्तावित है, जिससे खाद्य प्रसंस्करण, खनिज आधारित उद्योग और इंजीनियरिंग वर्क्स जैसे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
टीकमगढ़ जिले में औद्योगिक विकास की वर्तमान स्थिति
टीकमगढ़ जिले की बात करे तो यहां चार औद्योगिक क्षेत्र हैं, जिनमें कुल 32 औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। इनसे लगभग 12 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है और 358 लोगों को रोजगार मिला है। इसे भी उल्लेखीनय नहीं कहा जा सकता जबकि यहां भी एमपी सरकार की प्रमुख योजनाओं में बेल मेटल क्लस्टर और फर्नीचर क्लस्टर का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा, ग्राम सुनोरा खिरिया, कारी खास और लिधौरा उगड़ में भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय उद्योगों को और अधिक विस्तार मिलेगा ये सरकार का दावा है।
सागर में आयोजित रीजनल इंडस्ट्रीयल कॉन्क्लेव की तैयारियां
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निवाड़ी जिले में औद्योगिक विकास की वर्तमान स्थिति
निवाड़ी जिले की बात की जाए तो यहां केवल 3 औद्योगिक क्षेत्र हैं, जिनमें कुल 119 औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। यहां 135 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है और 1690 लोगों को रोजगार मिला है, ये सरकार का कहना है। महत्वपूर्ण परियोजनाओं में पैसिफिक मेटा स्टील्स द्वारा 1772 करोड़ रुपये के निवेश से इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जिससे 1164 लोगों को रोजगार मिलेगा ऐसा दावा है। साथ ही, बबेड़ी जंगल और ग्राम जेर में नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है जिससे भी एमपी सरकार को काफी उम्मीदें हैं।
दमोह जिले में औद्योगिक विकास की वर्तमान स्थिति
दमोह जिले में औद्योगिक विकास की वर्तमान स्थिति काफी पीछे है। यहां तीन औद्योगिक क्षेत्र हैं, जिनमें कुल 53 औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं। इनसे 16 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है और 210 लोगों को रोजगार मिला है। यहां मेसर्स जेएसडब्ल्यू सीमेंट द्वारा 3000 करोड़ रुपये के निवेश से सीमेंट प्लांट का निर्माण प्रस्तावित है। इससे स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी, ऐसी एमपी सरकार को उम्मीद है।
पन्ना जिले में औद्योगिक विकास की वर्तमान स्थिति
जबकि पन्ना जिला, जो हीरे की धरती के रूप में जाना जाता है इसमें औद्योगिक विकास की दिशा में जिले में केवल 2 औद्योगिक क्षेत्र हैं, जिनमें 20 औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। इनसे 46 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है और 178 लोगों को रोजगार मिला है। हालांकि प्रमुख परियोजनाओं में अमानगंज में 2000 करोड़ रुपये के निवेश से सीमेंट प्लांट का निर्माण और डायमंड बिजनेस पार्क की स्थापना जरूर हुई है।
क्या कॉन्क्लेव बदल पाएगा तस्वीर?
बुंदेलखंड में निवेशकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए जरूरी है कि सरकार वादों को जमीनी स्तर पर साकार करे। बुंदेलखंड की समस्याएं गहरी हैं और यहां केवल बड़ी घोषणाओं से बदलाव संभव नहीं होगा। खनिज संसाधनों से भरपूर यह क्षेत्र औद्योगिक विकास की प्रतीक्षा में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किए जा रहे वादे और सरकारी दावे बुंदेलखंड के लोगों के लिए उम्मीद जरूर जगाते हैं, लेकिन वास्तविक विकास तभी होगा जब इन वादों को ठोस योजनाओं और निवेशकों के सहयोग से साकार किया जाएगा।
मोहन सरकार दावा कर रही है कि सागर संभाग के सभी जिलों में खनिज आधारित उद्योग, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, पीतल, पेट्रोकेमिकल, बीड़ी, फर्नीचर, इंजीनियरिंग वर्क्स, प्लास्टिक और पैकेजिंग जैसे उद्योगों में अपार संभावनाएं हैं और वर्तमान में उठाए जा रहे कदमों से इन उद्योगों में व्यापक निवेश की उम्मीद है।