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Holi 2025: MP के इस गांव में सदियों से होली का खौफ, नहीं करते यह काम, जानें किस बात से डरे हुए हैं लोग

Fri, 14 Mar 2025 07:40 AM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर

सार

Holi 2025:  आदिवासी जनजातीय बहुल इस गांव में मां झारखंडन माता का एक पुराना मंदिर है। माता के प्रकोप के डर के कारण यहां कभी होली नहीं जलाई जाती। एक बार होलिका दहन करने पर गांव में आग लग गई थी।
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इस गांव में नहीं होता होलिका दहन। - फोटो : अमर उजाला
आज होली का त्योहार है, लोग उत्साह के साथ होली मनाने में जुटे हुए हैं। गांव-गांव और शहर-शहर में सुबह से ही लोगों ने रंग-गुलाल उड़ाना शुरू कर दिया है। इससे पहले गुरुवार रात को जगह-जगह होलिका दहन किया गया। लेकिन, बुंदेलखंड अंचल के सागर जिले में एक ऐसा गांव है जहां कई साल से होलिका दहन नहीं किया गया है। गांव के बुजुर्गों के अनुसार यह सिलसिला कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह हथखोय गांव जिले की देवरीकलां तहसील में हैं। 

दरअसल, आदिवासी जनजातीय बहुल इस गांव में मां झारखंडन माता का एक पुराना मंदिर है। माता के प्रकोप के डर के कारण यहां पर कभी होली नहीं जलाई जाती। ग्रामीणों कहते हैं कि पुराने बुजुर्गों के समय से गांव में कभी होली नहीं जली थी। एक बार ग्रामीणों ने अन्य गांवों की तरह यहां भी होली जलाने का विचार किया। होली जलाने की तैयारी होते ही पूरे गांव में अचानक आग लग गई।

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मां झारखंडन माता का मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
इससे  घबराए ग्रामीणों ने गांव के समीप बने मां झारखंडन मंदिर में अनुनय-विनय की, तब जाकर आग बुझी। इसके बाद, माता ने ग्रामीणों को स्वप्न देकर कहा कि जब इस गांव में मैं स्वयं विराजमान हूं तो होली जलाने की क्या आवश्यकता है। जब तक मैं हूं तब तक इस गांव में कोई नुकसान नहीं होगा। इसके बाद से यहां होली दहन की प्रथा पूरी तरह बंद हो गई।

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इस गांव में नहीं होता होलिका दहन। - फोटो : अमर उजाला
गांव के लोग क्या कहते हैं?
मंदिर के पुजारी छोटेलाल ठाकुर और ग्रामीण रामसिंह ने बताया कि हमारे गांव में सदियों से होली नहीं जलाई गई। इसके पीछे गांव में विराजमान मां झारखंडन का प्रताप है। हमारे गांव में न कभी होली जलाई गई। यहां माता के प्रभाव से होली जलाने की परंपरा नहीं है। गांव में चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ा मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से लोग आते हैं।

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बुजुर्ग प्रेमरानी। - फोटो : अमर उजाला
जब से शादी हुई तब से होली जलते नहीं देखी
गांव की 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला प्रेमरानी कहती है कि शादी कर जब से इस गांव में आई हूं होली जलते नहीं देखी। यहां होली जलाने की परंपरा नहीं है। यहां लेकिन खेलने की मनाही नहीं है। ग्रामीण होली खेलते हैं, बस माता के प्रकोप के डर से होली नहीं जलाते हैं।  

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इस गांव में नहीं होता होलिका दहन। - फोटो : अमर उजाला
कुलदेवी हैं झारखंडन माता
ग्रामीणों ने बताया- मां झारखंडन कई परिवारों की कुलदेवी भी हैं। यहां मन्नत मांगने पर बच्चों का मुंडन संस्कार भी होता है और पिकनिक मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

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