महेश्वर की श्री राम कुटी में स्वर्गीय मुन्नी बाई की स्मृति में अग्रवाल परिवार ने साधु-संतों की सुविधा के लिए नए कमरों का निर्माण करवाया। पीडी अग्रवाल और परिवार ने इन कमरों को श्री राम कुटी ट्रस्ट को समर्पित किया। इस अवसर पर पूजन-हवन, भजन-कीर्तन और सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
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श्री राम कुटी ट्रस्ट की ओर से अग्रवाल परिवार को सम्मानित किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
सियाराम बाबा के परम भक्त अग्रवाल परिवार ने स्वर्गीय श्रीमती मुन्नी बाई की स्मृति में महेश्वर की श्री राम कुटी में नए कमरों का निर्माण करवाकर उन्हें श्री राम कुटी ट्रस्ट को समर्पित किया। सकल समाज के साधु-संतों की सुविधा के लिए परिवार द्वारा अपने निजी स्तर पर कराए गए इस निर्माण से कुटी परिसर की व्यवस्थाओं में विस्तार हुआ है। निर्माण कार्य पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में पूजन-हवन और भजन-कीर्तन किए गए। इस अवसर पर श्री राम कुटी ट्रस्ट की ओर से अग्रवाल परिवार सहित उपस्थित अतिथियों का स्वागत कर शॉल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया।
निर्माण कार्य पूर्ण होने पर पूजन पाठ किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि नर्मदा परिक्रमा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से साधु-संत और श्रद्धालु महेश्वर पहुंचते हैं। ऐसे में उनके ठहरने और विश्राम के लिए बेहतर व्यवस्था का विशेष महत्व है। श्री राम कुटी में निर्मित नए कमरे सकल समाज के साधु-संतों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इससे कुटी परिसर की शोभा बढ़ने के साथ ही व्यवस्थाओं को भी बेहतर स्वरूप मिला है।
निर्माण पूर्ण होने के बाद परिवार ने कमरों को श्री राम कुटी ट्रस्ट को सुपुर्द कर दिया
- फोटो : अमर उजाला
मुन्नी बाई की स्मृति में यह निर्माण उनके पुत्र पीडी अग्रवाल (आलू वाले) एवं समस्त अग्रवाल परिवार, इंदौर की ओर से कराया गया। निर्माण पूर्ण होने के बाद परिवार ने कमरों को श्री राम कुटी ट्रस्ट को सुपुर्द कर दिया, ताकि इनका उपयोग साधु-संतों की सुविधा के लिए किया जा सके। कार्यक्रम में पीडी अग्रवाल, गोविंद अग्रवाल, किरण दीदी, रमेश उस्ताद यादव और कमल वर्माजी का स्वागत किया गया। श्री राम कुटी ट्रस्ट की ओर से कार्यकारिणी अध्यक्ष चंद्रशेखर कर्णिक, कोषाध्यक्ष विकास दुबे एवं सचिव जितेंद्र नेगी ने परिवार के इस कार्य की सराहना करते हुए सम्मान किया। इस अवसर पर उपस्थित सदस्य अशोक मित्तल एवं बाल कृष्णा करण्डे एडवोकेट जितेंद्र नेगी, धार्मिक आस्था के साथ साधु-संतों की सेवा को समर्पित यह पहल मुन्नी बाई की स्मृति को स्थायी रूप से जोड़ने का माध्यम बनी है।