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संस्कारधानी के वॉटर मैन: शंकरलाल 26 साल से पिला रहे पानी, रोज 500 लीटर नर्मदा जल लेकर साइकिल से करते हैं सफर

Fri, 06 May 2022 10:40 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

संस्कारधानी के वॉटर मैन: शंकरलाल 26 सालों से पिला रहे पानी, रोज 500 लीटर नर्मदा जल लेकर साइकिल से करते हैं सफर
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MP: राहगीरों को पानी पिलाते शंकर लाल सोनी। - फोटो : सोशल मीडिया
मध्य प्रदेश का जबलपुर शहर अपने संस्कारों के लिए जाना जाता है। ऐसे ही संस्कारों को आगे बढ़ा रहे हैं जबलपुर के अधारताल में रहने वाले शंकर लाल सोनी। पूरा शहर शंकर लाल को उनके नाम की जगह वॉटर मैन के नाम से जानता है। उन्हें वॉटर मैन कहने की वजह है उनका काम जो वह बिना रूके बीते 26 साल से लगातार करते जा रहे हैं। 
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26 सालों से लगातार लोगों को पिला रहे हैं नर्मदा जल। - फोटो : सोशल मीडिया
'पानी पिलाना पुण्य का काम है' ये कहते हुए आपने कई बार सुना होगा, लेकिन 68 वर्षीय शंकर लाल इस काम को कर आत्मिक संतुष्टि प्राप्त कर रहे हैं। भीषण गर्मी में जब सुबह के वक्त भी लोग अपने घरों से बाहर निकलने में कतराते हैं, सड़क में चलते लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे होते हैं, तब शंकर लाल खुद ऐसे लोगों के पास पहुंचकर उनका गला तर करते हैं और सभी को पानी बचाने का संदेश देते हैं। वह हर दिन 500 लीटर नर्मदा जल लेकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में अपनी साइकिल से पहुंचते हैं और प्यासों को बिना किसी राशि के नि:शुल्क ताजा पानी पिलाते हैं।
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वॉटर मैन के नाम से जाने जाते हैं शंकर लाल सोनी। - फोटो : सोशल मीडिया
अधारताल में रहने वाले शंकर लाल हर सुबह अपने घर से साइकिल लेकर 10 किमी दूर नर्मदा घाट के लिए निकलते हैं, जहां से वह छागलों में 500 लीटर पानी भरकर शहर की सड़कों में निकल जाते हैं। उनका कहना है कि वह हर दिन 500 लीटर पानी लोगों को पिला देते हैं, अगर पानी खत्म हो जाता है तो वह वापस नर्मदा तट पहुंचकर पानी भरते हैं और इस नेक काम में लग जाते हैं। 
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साइकिल पर लगी तफ्तियों से देते हैं जल संरक्षण का संदेश। - फोटो : सोशल मीडिया
शंकर लाल ने अपनी साइकिल के दोनों ओर तफ्तियां लगा रखी हैं, जिसके माध्यम से वह लोगों को पानी की महत्ता बताने के साथ ही उसके संरक्षण और पौधरोपण की अपील करते हैं। लोग गर्मी के दिनों में प्याऊ लगवाते हैं, लेकिन शंकर लाल ने अपनी साइकिल को ही चलता फिरता प्याऊ बना लिया है। वह समाज के अन्य लोगों के लिए एक मिसाल हैं। जहां आज के वक्त में लोग प्यासे को पानी पिलाने से भी कतराते हैं, तो वहीं, शंकर लाल खुद प्यासे के पास कुआं बनकर पहुंच जाते हैं।
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