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MP News: अंग्रेजों के जमाने का ओंकारेश्वर रेलवे स्टेशन तोड़ा गया, इसके लोहे भी तब की इमानदारी बयां कर रहे

Sat, 28 Sep 2024 06:10 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर

सार


MP News: अंग्रेजों के जमाने का ओंकारेश्वर रेलवे स्टेशन तोड़ा गया, इसके लोहे भी तब की इमानदारी बयां कर रहे
 
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ओंकारेश्वर रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
साल 1872 में अंग्रेजों ने ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन का निर्माण करवाया था। डेढ़ सौ साल बीत जाने के बाद भी इतना मजबूत था कि उसे तोड़ने में बड़ी-बड़ी मशीनें लगी थीं। इसके अंदर के लोहे उस समय की इमानदारी की कहानी बयां कर रहे हैं। टूटने के बाद भी पूरी तरह मजबूत हैं।
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ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
अंग्रेजों ने आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान को जोड़ने के लिए हैदराबाद से लेकर अजमेर तक मीटर गेज लाइन का निर्माण करवाया था। मध्य भारत की सबसे बड़ी दो हजार किलोमीटर लंबी मीटर गेज लाइन डाली थी।
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ओंकारेश्वर रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि इस रेल मार्ग से आने वाले रेल यात्रियों की सुविधा को देखते हुए इस रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया था। क्योंकि यहीं से रेल यात्री उतरकर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दर्शन करने पहुंचते थे। 

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रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
रेलवे स्टेशन से दक्षिण-पश्चिम जाने के लिए रेल में बैठकर अपने गंतव्य स्थान को जाते थे। उनकी सुविधा को देखते हुए खंडवा, इंदौर और इच्छापुर सड़क मार्ग पर स्थित नर्मदा किनारे मोरटक्का जिसे ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन के नाम से भी जाना जाता है, उस समय का सर्व सुविधायुक्त रेलवे स्टेशन का निर्माण 1872 में शुरू कर 1874 में मात्र दो साल की अवधि में पूरा कर लिया गया था, जो अब टूट कर पूरी तरह से जमींदोज हो चुका है।
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रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
लेकिन ब्रिटिश काल में इस रेलवे स्टेशन का निर्माण इतनी मजबूती से किया गया था कि इसके निर्माण में बीम कालम में रेलवे लाइन की गाडरे लगाई गई। स्टील के सरिया रेती चुने शीशम से छत भरी गई थी। तोड़ने के बाद भी पूरी तरह से सुरक्षित निकली है।
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रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
साल 1995 में केंद्र में नरसिम्हा राव सरकार में सुरेश कलमाड़ी केंद्रीय रेल राज्य मंत्री थे। स्पेशल ट्रेन से इंदौर से ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन पहुंचकर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद जब वह पुनः वापस स्टेशन पर आए तो उन्होंने रतलाम रेल मंडल के डीआरएम को निर्देश दिए कि ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन को ऊपर से ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का स्वरूप दिया जाए। उसके बाद रेलवे विभाग रेलवे स्टेशन के ऊपर मंदिर के स्वरूप में रेलवे स्टेशन को बनाया।
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रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
प्रसिद्ध समाजसेवी अजय कुमार मिश्रा (75) ने बताया, उनके पिता स्वर्गीय बद्री विशाल मिश्रा उन्हें बताते थे कि इसका निर्माण अंग्रेज शासन काल में जब मीटर गेज की लाइन डाली थी तब हुआ था। मेरे पिता जी कहा करते थे कि अंग्रेज बड़ी शक्ति से काम लेते थे। 
 

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रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
अजय कुमार मिश्रा ने बताया, 70 साल से मैं स्वयं भी इस रेलवे स्टेशन  को देखता आया हूं। बचपन में अपने दोस्तों के साथ खेला करता था। ग्राम पंचायत मोरघड़ी के गोवर्धन पटेल (90) ने बताया कि गांव के बुजुर्ग हमें बताया करते थे कि अंग्रेजों के जमाने में रेलवे स्टेशन एवं नर्मदा नदी पर पुल का निर्माण किया गया था। मुझे भी इस स्टेशन के टूटने का बहुत दुख है। लेकिन खुशी भी है कि दो किलोमीटर दूर ब्रॉड गेज की बड़ी-बड़ी ट्रेनों के लिए नए रेलवे स्टेशन का निर्माण 70 फीसदी पूरा हो गया है।
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रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
जो साल 2025 मार्च तक बनकर तैयार हो जाएगा। यही समय की मांग है। परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। ब्रॉड गेज की लाइन डालने से पूरे भारत से लोग नवनिर्मित ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन पहुंचकर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जा सकेंगे।
 
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