इंदौर शहर (प्रतीकात्मक)
इंदौर ने बहुत कुछ किया...
कूड़ेदानों की निगरानी के लिए 700 से अधिक नए कर्मचारी, शौचालयों और मूत्रालयों से लेकर 3,000 सड़क किनारे डिब्बे और लाइव ट्रैकिंग प्रणाली। हरे-पीले रंग की कचरा वैन इंदौर के बाहरी इलाके में जब अनुराधा नगर की झुग्गियों में पहुंचती है, तो यहां की संकीर्ण गलियां, आधी टूटी बाल्टी काफी कुछ बताती है। प्रतिदिन सुबह 7 बजे से, बॉलीवुड गायक शान की आवाज में वैन के लाउडस्पीकर के माध्यम से एक ही गूंज सुनाई देती है- इंदौर हुआ है नंबर एक, इंदौर रहेगा नंबर एक।
2019 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सबसे स्वच्छ शहर के लिए इंदौर ने हैट्रिक लगाई थी। इंदौर नगर निगम के जोनल प्रभारी मोनेश गावड़े के मुताबिक यहां बच्चों के दृष्टिकोण में बदलाव को लेकर काफी गंभीरता है। यदि उनके माता-पिता नहीं होते तो ये बच्चे खुद सूखे और गीले कचरे को फेंकने के लिए आते हैं। इससे पहले प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे का अधिकांश भाग खुली नालियों या देवगुराड़िया लैंडफिल में फेंका जाता था, ये निजी सफाइकर्मियों पर निर्भर करता था कि वो कैसे इस गंदगी को साफ करें।