मल्हार आश्रम मां अहिल्या सघन वन का लैंड यूज चेंज करने का आरोप, ग्रीन बेल्ट की जमीन पर पहले हरियाली लगाई, अब नए प्रोजेक्ट ले आए, कई बड़े प्रोजेक्ट में हजारों पेड़ कटने का विरोध
इंदौर में पेड़ों की कटाई का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। नए प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार और प्रशासन अब ग्रीन बेल्ट की जमीन भी उपयोग में लेने लगा है। इसमें मल्हार आश्रम का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दो साल पहले नगर निगम ने माता अहिल्या के जन्म के त्रिशताब्दी वर्ष में मां अहिल्या सघन वन योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत कई संस्थाओं से यहां पर पौधे लगाने का आग्रह किया गया था। दो साल के बाद जब यह पौधे बड़े हो गए हैं तो अब निगम ने इन्हें काटना शुरू कर दिया है। यहां पर सीएम राइस स्कूल और स्पोट्र्स सेंटर के प्रोजेक्ट आ रहे हैं। जिन संस्थाओं ने यहां पर पौधे लगाए थे वह अब इसका विरोध कर रही हैं।
लैंड यूज चेंज करने का आरोप
ग्राहक पंचायत के इंदौर महानगर अभा सचिव गोपाल साहू ने बताया कि हमें दो साल पहले बंजर जमीन दी गई थी। हमने इस जमीन पर खुदाई की, पानी की व्यवस्था की और पौधे लगाए। दो साल तक हमने इन पौधों का ध्यान रखा। अब ये पौधे बड़े हो गए हैं तो इन्हें काटा जा रहा है। गोपाल साहू अधिवक्ता भी हैं और उन्होंने बताया कि हमने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, कलेक्टर आशीष सिंह और महापौर पुष्यमित्र भार्गव को इस विषय की जानकारी दी। इसके बाद महापौर ने प्रभारी अधिकारी विवेक उपाध्याय को मामले की जांच करने के लिए कहा। जांच के बाद प्रभारी अधिकारी ने हमें बताया कि यह जमीन पहले ग्रीन बेल्ट में थी लेकिन अब इसका लैंड यूज बदल दिया गया है। इस पर सीएम राइज स्कूल का काम शुरू हो रहा है।
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रहवासियों और संस्थाओं ने दर्ज करवाई आपत्ति।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल, इंदौर
मैं मामले की जांच करवा रहा हूं
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मैंने जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने अभी मुझे रिपोर्ट नहीं दी है। शहर की संस्थाएं मेरे पास शिकायत लेकर आईं थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मैं कुछ कह पाऊंगा।
खास आंकड़े
15000 पौधे लगाए गए हैं यहां पर
70 प्रजाति के अलग अलग पौधे लगे
2 साल के बाद सभी पेड़ पौधे काटे जा रहे
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मल्हार आश्रम में हरियाली पर चलता क्रेन का हथौड़ा।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल, इंदौर
सौ साल पुराने पेड़ भी काटे गए, मलबे में दबा दिए
अमर उजाला ने ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जब यहां पर कटे हुए पेड़ों का जायजा लिया तो पता चला कि सौ से दौ सौ साल पुराने पेड़ भी यहां पर बड़ी संख्या में काटे गए हैं। जगह जगह कटे हुए पेड़ों के तने पड़े हुए हैं। इसके साथ कई जगह पेड़ों को काटकर मलबे में दबा दिया गया है ताकि किसी को पता न चल सके। मिट्टी हटाने पर सिर्फ पेड़ों के कटे हुए तने दिखाई पड़ते हैं।
इंदौर में कितने और पेड़ कटेंगे
इंदौर में हजारों पेड़ों की कटाई का अनुमान है। शहर की जनता, कई संस्थाएं और जनहित पार्टी इन पेड़ों की लिस्टिंग कर रही है। अनुमान के मुताबिक इंदौर में अगले कुछ महीनों में 28 हजार से अधिक पेड़ कटेंगे।
मेट्रो - एक हजार पेड़
खंडवा रोड परियोजना - पांच हजार पेड़
हुकुमचंद मिल - पांच हजार पेड़
एमओजी लाइन - दो हजार पेड़
मल्हार आश्रम - 15 हजार पेड़
जगह जगह पर प्राचीन पेड़ों का काटकर ढेर लगा दिया है।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल, इंदौर
निगम के पास पेड़ों की संख्या उपलब्ध नहीं
इंदौर नगर निगम के पास शहरी और ग्रामीण सीमा में उपलब्ध पेड़ों की संख्या उपलब्ध नहीं है। निगम को यह भी जानकारी नहीं है कि आगामी महीनों में आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए कितने पेड़ काटे जाने हैं। शहर की संस्थाएं निगम से यह डाटा सार्वजनिक करने की मांग कर रही हैं। जनहित पार्टी के अभय जैन ने कहा कि कितने पेड़ कटने वाले हैं इसका डाटा निगम को सार्वजनिक करना चाहिए। हम खुद हर जगह जाकर पेड़ों की नपती कर रहे हैं और कोर्ट के लिए डाटा जुटा रहे हैं। कोर्ट को डाटा देने के बाद हम सभी जगह पेड़ों की कटाई रुकवाएंगे।