23 मार्च को शहीद दिवस आ रहा है। इंदौर में शहीदों की याद में आइडीए (इंदौर विकास प्राधिकरण) ने जनता के करोड़ों रुपए खर्च कर शहीद पार्क बनाया था। पांच साल के बाद भी यह शहीद पार्क बंद पड़ा है। पार्क की बदहाली का आलम यह हो चुका है कि अब तो यहां की दीवारें भी टूटने लगी हैं। जब अमर उजाला के रिपोर्टर ने अंदर जाकर हालात देखे तो पता चला कि हर जगह गंदगी पसरी हुई है और सब कुछ टूट-फूट रहा है। शहीद स्मारक के आसपास की पूरी जगह ही कचरे से भरी हुई है।
कभी नेताओं की तो कभी जनता की राह देखता रहा शहीद पार्क
पूर्वी रिंग रोड पर रोबोट चौराहे के पास पांच साल पहले बनकर तैयार हुआ शहीद पार्क कभी उद्घाटन के लिए बड़े नेताओं की राह देखता रहा तो कभी जनता के आने का इंतजार करता रहा। पांच साल पहले जड़ा तला आज तक नहीं खुला और संबंधित विभागों और अधिकारियों ने कभी भी इसका महत्व नहीं समझा। लगभग चार करोड़ रुपए से बने इस शहीद पार्क को अब आइडीए ने नगर निगम को दे दिया है लेकिन निगम कब इसकी सुध लेगा यह भी बताने को कोई राजी नहीं है।
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कई जगह की दीवारें पूरी तरह से टूट चुकी हैं।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
ग्यारह लाख रुपए की फोटोफ्रेम भी बर्बाद
पार्क में 100 शहीदों की जीवनी दिखाने के लिए ग्यारह लाख रुपए की फोटोफ्रेम बुलवाईं गईं थी। यह भी बदहाल हालात में एक कमरे में रखी हुई हैं। जहां फोटोफ्रेम रखी हैं वहां पर ताला लगा है और अंदर की तस्वीर नहीं ली जा सकी।
यह सब रहेगा यहां
यहां पर एक फोटो गैलरी हॉल तैयार किया है।
इसके ऊपर ही ओपन थिएटर है। यहां पर राष्ट्रभक्ति से प्रेरित आयोजन करने की योजना है।
फोटो गैलरी में शहीद का फोटो व उसकी संक्षेप्त में जानकारी रहेगी।
लाइव श्रद्धांजलि के लिए स्ट्रक्चर बनाया है।
सांस्कृतिक व देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों के लिए एक ओपन ऑडिटोरियम का भी निर्माण किया है।
गेट को लोहे की चद्दरों से बंद करके रखा है।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
आइडीए अपना काम पूरा कर चुका
आइडीए नगर निगम को पार्क सौंप चुका है। पहले साल रखरखाव के लिए 10 लाख रुपए का खर्च भी दिया गया है। अब निगम को ही तय करना है कि इसे वह कब शुरू करेगा।
- जयपाल सिंह चावड़ा, आइडीए चेयरमैन
निगमायुक्त ने नहीं उठाया फोन
इस मामले में बात करने के लिए निगमायुक्त प्रतिभा पाल को कई बार फोन लगाया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।