Indore News: पर्यावरण प्रहरियों ने वृक्ष को 'गुरु' मानकर सिर मुंडवा लिया। प्रदर्शनकारियों ने परिसर में अन्य पेड़ों की अवैध कटाई पर भी रोष व्यक्त किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए शहर की हरित विरासत को बचाने का संकल्प लिया।
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पेड़ों की हत्या पर लोगों ने करवाया मुंडन।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
शहर में हो रही पेड़ों की अनवरत कटाई पर निराश पर्यावरणप्रेमियों ने आज कटे हुए पेड़ों के पास मुंडन करवाया। इन्होंने पेड़ों की कटाई को हत्या बताते हुए कहा कि सब जगह प्रयास करने के बावजूद भी शहर में अवैध तरीके से पेड़ों की कटाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। थक हारकर अब हमें ईश्वर से गुहार लगाना पड़ रही है। इस शहर के पेड़ों को बचाए और इंदौरियों की सांसों को सुरक्षित रखे।
300 साल पुराने पेड़ के साथ कई पेड़ काट दिए गए।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
हाल ही में लालबाग स्थित गुरुनानक कॉलोनी के बारामस्था बगीची परिसर में मौजूद करीब 300 वर्ष पुराने पीपल के वृक्ष की निर्दयतापूर्वक कटई कर दी गई। इसके विरोध में रविवार को एक भावपूर्ण प्रार्थना सभा और दीपदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी परिसर में अन्य भी पेड़ काटे गए हैं। पर्यावरणप्रेमियों ने कहा कि एमओजी लाइन, खंडवा रोड, उज्जैन रोड, मल्हारआश्रम, विजय नगर हर जगह पेड़ों की कटाई चल रही है। एक साल से चल रहे आंदोलन के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर जरा भी प्रभाव नहीं पड़ रहा और पेड़ों की कटाई अनवरत जारी है। इसी के चलते आज मुंडन और दीपदान का कार्यक्रम रखा गया। ईश्वर से प्रार्थना का गई कि शहर के नेताओं को सद्बुद्धि मिले।
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चंद्रशेखर गवली और सुनील वर्मा ने मुंडन करवाया।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विरोध का अनूठा तरीका, 'केश दान' से दिया संदेश
शहर में अनियंत्रित रूप से हो रही वृक्षों की कटाई के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए पर्यावरण प्रहरी मुकेश रजत वर्मा और चंद्रशेखर गवली ने एक अनूठा कदम उठाया। उन्होंने पीपल को "गुरु स्वरूप" मानकर प्रायश्चित स्वरूप अपने सिर का मुंडन कराया। उनके इस 'केश दान' का उद्देश्य धरोहर वृक्षों के प्रति लोगों में जागरूकता लाना और उनके संरक्षण के लिए उत्तम भाव जागृत करना था।
बड़ी संख्या में पर्यावरणप्रेमी पहुंचे।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
भावपूर्ण प्रार्थना और दीपदान
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने पीपल वृक्ष के चारों ओर दीप जलाकर उसके शीघ्र पुनर्जीवन के लिए "इतनी शक्ति हमें देना दाता" प्रार्थना का सामूहिक गान किया। उपस्थित लोगों ने कहा कि यह सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि होलकरकालीन विरासत का प्रतीक है, जिसे संरक्षित किया जाना चाहिए था।
एक ही परिसर में तीन और पेड़ काटे गए
इसी दौरान यह बात भी सामने आई कि परिसर में अवैध निर्माण के लिए हाल ही में तीन अन्य हरे-भरे पेड़ों को भी बेरहमी से काट दिया गया है। यह जानकर लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। मौके पर मौजूद लोगों ने काटे गए पेड़ों को श्रद्धांजलि दी। शिकायत के बाद नगर निगम के उद्यान प्रभारी ने स्थल पर पहुंचकर पंचनामा तैयार किया, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नेताओं और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि वृक्षों की अवैध कटाई के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। लोगों ने इस बात पर भी रोष व्यक्त किया कि पूर्व में जनसुनवाई के दौरान की गई शिकायत पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सभा के अंत में सभी ने इंदौर की हरित धरोहर को बचाने और वृक्षों की रक्षा को अपना सामाजिक उत्तरदायित्व बनाने का संकल्प लिया।