फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Diwali 2022: यहां दिवाली पर पीले चावल देकर लक्ष्मीजी को घर बुलाते हैं भक्त, होलकर राजाओं से जुड़ा है इतिहास

Mon, 24 Oct 2022 06:54 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

Diwali 2022: यहां दिवाली पर पीले चावल देकर लक्ष्मीजी को घर बुलाते हैं भक्त, होलकर राजाओं से जुड़ा है इतिहास
विज्ञापन
1 of 3
राजवाड़ा स्थित इंदौर का प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया
मध्यप्रदेश के कई शहरों में मां लक्ष्मी के प्राचीन मंदिर स्थित हैं। उज्जैन में विश्व की इकलौती गज लक्ष्मी की प्रतिमा है, तो जबलपुर में 11 सौ साल पुराना मां लक्ष्मी का सिद्ध मंदिर स्थित है। इंदौर के राजवाड़ा में होलकर कालीन महालक्ष्मी मंदिर स्थित है। कहा जाता है इस मंदिर की वजह से ही होलकर राजाओं को कभी अपने राज्य में धन की कमी नहीं हुई। मंदिर में दिवाली के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त यहां देवी महालक्ष्मी के दर्शन और उपासना करने पहुंचते हैं। मंदिर आने वाले भक्तों में इंदौर के साथ ही आसपास के जिलों से आने वाले लोग भी शामिल रहते हैं।

राजवाड़ा पर स्थित है मंदिर
महालक्ष्मी का करीब 188 साल प्राचीन यह मंदिर इंदौर की ऐतिहासिक धरोहर राजवाड़ा पर स्थित है। मंदिर के पुजारी के अनुसार होलकर कालीन मंदिर की स्थापना 1833 में इंदौर के राजा हरि राव होलकर ने की थी। उस दौर में यहां मंदिर नहीं था, प्रतिमा की स्थापना एक पुराने मकान में की गई थी। होलकर वंश के लोग उस समय नवरात्र और दिवाली पर माता के दर्शन करने आते थे। इसके साथ ही खजाना खोलने से पूर्व भी होलकर राजवंश मां महालक्ष्मी का आशीष लेता था। इस मंदिर में होलकर काल से चली आ रही परंपरा आज भी देखने को मिलती है। इंदौर वासियों के लिए यह मंदिर बेहद खास है।
 
विज्ञापन

2 of 3
महालक्ष्मी मंदिर में दिवाली के मौके पर की गई विशेष सजावट - फोटो : सोशल मीडिया
दिवाली पर होता है पांच दिन उत्सव
हर साल दीपावली के मौके पर मंदिर में 5 दिवसीय महोत्सव होता है। धनतेरस से शुरू होकर ये महोत्सव भाईदूज पर पूरा होता है। इस मौके पर यहां लाखों दर्शनार्थी मंदिर पहुंचते हैं। दिवाली के दिन मंदिर के पट सुबह तीन बजे खोल दिए जाते हैं। 11 पंडित मां लक्ष्मी का विशेष अभिषेक करते हैं और फिर श्रृंगार के बाद माता की महाआरती की जाती है। हालांकि इस बार ग्रहण के चलते चार दिन ही दीपोत्सव मनाया जा रहा है। 

ये भी पढें: Diwali 2022: यहां 1100 वर्षों से विराजमान हैं धन की देवी मां लक्ष्मी, औरंगजेब ने इस मंदिर पर किया था आक्रमण

पीले चावल देकर आमंत्रित करते हैं भक्त
दिवाली के मौके पर भक्त मंदिर पहुंचकर माता लक्ष्मी को पीले चावल देकर अपने घर आने का आमंत्रण देते हैं। भक्त मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं कि हमारे घर पधारें और सुख-समृद्धि का आशीष दें। भक्त मंदिर में जो चावल चढ़ाते हैं, उनमें से कुछ चावल मन्नत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं और फिर उसे घर की तिजोरी और दुकान के गल्ले में रखते हैं ताकि वर्षभर बरकत बनी रहे। बताया जाता है कि यह सिलसिला मंदिर की स्थापना के बाद से लगातार जारी है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

3 of 3
188 वर्ष पुराना है मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया
मंदिर से जुड़े हैं चमत्कार के किस्से
महालक्ष्मी मंदिर से चमत्कार के कई किस्से जुड़े हैं। बताया जाता है कि मंदिर तीन बार क्षतिग्रस्त हुआ लेकिन एक भी बार माता की प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। पंडित उज्जैनकर ने बताया कि 1928 के दौर में मंदिर कच्ची मिट्टी से बना था, उस समय अचानक मंदिर गिर गया, लेकिन मंदिर की छत पर लगी लकड़ियां इस तरह से गिरी कि वह प्रतिमा के ऊपर ढाल बन गईं और प्रतिमा को मलबे से कोई नुकसान नहीं पहुंचा। वहीं,दूसरी बार 1972 मंदिर में आग लग गई थी, उस समय मंदिर जलकर खाक हो गया लेकिन प्रतिमा सुरक्षित बची, कुछ वर्षों पहले 2011 में तीसरा हादसा हुआ। मंदिर की छत का प्लास्टर गिर गया था, लेकिन तब भी प्रतिमा और मंदिर में स्थित पुजारी पूरी तरह सुरक्षित रहे।

आज भी मंदिर होलकर रियासत के दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारी अपने दिन की शुरुआत मंदिर में मां लक्ष्मी के दर्शन के साथ करते हैं तो वहीं क्षेत्र के व्यापारी भी अपने धंधे की शुरुआत मंदिर में माथा टेकने के बाद ही करते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें